देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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लड्डू होली पर निकली दूसरी चैपाई
मथुरा। विश्व प्रसिद्ध श्रीजी मंदिर बरसाना में शुक्रवार को भक्तों पर प्रेम पगे लड्डुओं की जमकर बर्षा हुई। इस दौरान देशी-विदेशी श्रद्धालुओं ने लड्डू होली का जमकर आनंद लिया। बरसाना की कुंज गलियों में होली की चैपाई भी निकाली गई। इसी के साथ फाग महोत्सव का शुभारंभ हो गया।
शुक्रवार को श्री कृष्ण की प्रियतमा राधा रानी की जन्म स्थली नंद गांव से बरसाना पहुंचे पुरोहित ने लड्डू मारकर होली खेली। इस दौरान बरसे अबीर गुलाल के बीच देश विदेश से आए श्रद्धालुओं ने लड्डू लुटा कर खुद को धन्य समझा। शुक्रवार सायं लाडली जी मंदिर प्रांगण में अबीर गुलाल की इंद्रधनुषी छटा के मध्य नंदनगांव के पंडा समाज के मध्य पहुंचा, गोस्वामी समाज ने नंदगांव को पांडे ब्रिज बरसाने आयौ, भर होरी के बीच सजन समुधाने आयो। पांडे जू के पायन कौ हस सीस नवायौ , अति उदार वृषभानु राय सन्मान करायौ। सर्वप्रथम पांडे ने श्री राधा जू के चरणों में सिर झुका कर उनका अभिवादन करते हुए। नंद गांव से लाया गया अबीर गुलाल राधा जी के चरणों में अर्पित करते हुए कहा कि फागुन शुक्ल नवमी को कान्हा अपने भाई बलराम व सखा मधुमंगल आदि के साथ होली खेलने के लिए आएंगे। कन्हैया के होली खेलने की सूचना देने के बाद बरसाना की गोपियों ने पांडे को रंग लगाती है। किशोरी जी से सखियों से छोड़ने की बात कहता है ।तब जाकर सखियां उसको छोड़ती है। मंदिर के सेवायतो ने पांडे को माला पहनाकर भोग प्रसाद भेंट किया। भांग ठंडाई पिलाकर चकाचक कर दिया ।गोस्वामी समाज के मध्य पहुंच कर होली के पदों के बीच पंडा थिरकने लगा ।तभी चारों ओर से अबीर गुलाल और श्रद्धालुओं द्वारा लड्डू की वर्षा होने लगी। लड्डुओं को लपक कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य मान रहे थे। इस मौके पर गाया गयाष् देवता आकाश ठाड़े पुष्पन करें फूले नर नर-नारी मिले आनंद विनोद में ष्मान्यता है कि इस लीला को देखने के लिए देखता भी आकाश में खड़े हो जाते हैं। इसके बाद संध्या आरती हुई ।संध्या आरती के बाद लाडली जी मंदिर में महीभान मंदिर, सुदामा चैक, फूल गली, होते हुए रंगीली गली तक होली की द्वितीय चैपाई निकालते हुए। लोगों को संदेश दिया कि कल शनिवार को नंदगांव से कान्हा अपने ग्वाल बालों के साथ होली खेलने के लिए आ रहे हैं। चैपाई के दौरान श्बरसाना अधर कमल पै , छवि देख को किलावन की, काली देह पै खेल मचाया आदि पदों का का गायन किया गया ।अबीर गुलाल के साथ होरी के रसियाओ पर जमकर थिरके श्रद्धालु। चैपाई को देखने के लिए रास्तों ,गलियों ,और मकानों की छतों पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे ।चैपाई के दौरान उड़े अबीर गुलाल से बरसाने की गलियां रगों में सरोवर दिखाई दे रही थी।













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