देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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बरसाना: एक तरफ योगी सरकार द्वारा गोवर्धन के मंदिरों के अधिग्रहण करने की घोषणा के बाद सेवायतों व सन्तो ने सरकार के खिलाफ विरोध के स्वर प्रकट किये है तो वहीं बरसाना के ग्रामीणों ने गोवर्धन की तरह बरसाना के मंदिरों का भी अधिग्रहण करने के लिए सीएम योगी को पत्र लिखकर मांग की है। इस दौरान ग्रामीणों ने मीटिंग कर राधारानी मन्दिर पर घटी अबतक की घटनाओं व सेवायतों के मनमानी पर प्रकाश डाला।
जानकारी के लिए बता दे कि पिछले महीने योगी सरकार ने गोवर्धन के तीन प्रमुख मंदिरों का अधिग्रहण कर श्राइन बोर्ड गठन करने की बात कही। जिसके चलते मन्दिर सेवायतों के साथ कुछ सन्त भी सरकार के इस निर्णय को गलत बताकर विरोध कर रहे है। लेकिन वहीं बरसाना के ग्रामीणों ने सीएम योगी को पत्र लिखकर राधारानी मन्दिर, विलासगढ़, दानगढ़ व मानगढ़ मन्दिर का भी अधिग्रहण कर उन्हें भी श्राइन बोर्ड गठन करने की मांग की। वहीं सोमवार को कस्बे के शहीद भगतसिंह क्रांति दल के कार्यालय पर दर्जनों ग्रामीण एकत्र हुए राधारानी मन्दिर पर अबतक घटी घटना व अव्यवथाओ पर प्रकाश डाला। मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे ब्रजचार्य पीठ के प्रवक्ता घनश्यामराज भट्ट ने कहाकि बरसाना सहित अष्ट सखी गांव के ब्रजवासी व ब्रजचार्य पीठ योगी सरकार के इस फैसले का स्वागत करती है। सरकार को गोवर्धन ही नही ब्रज के सभी मंदिरों का अधिग्रहण कर उन पर भी श्राइन बोर्ड गठन किया जाए। जिससे श्रद्धालुओ को बेहतरीन सुविधा मिले। क्रांति दल के संस्थापक पदम् फौजी ने कहाकि मन्दिर अब मंदिर नही रहा क्योंकि यह सेवायतों की दुकान बन गयी है। जहाँ श्रद्धा व आस्था का सिर्फ दिखवा होता है असल मे तो यहाँ ठाकुर जी का मोल भाव होता है। जो श्रद्धालु ज्यादा पैसा चढ़ता है उसे ही अच्छे दर्शन व प्रसाद मिलता है। जबकि सेवायतों के इसी अव्यवथाओ के चलते 2012 में भगदड़ हो गयी। जिसमे तीन श्रद्धालुओ की मौत हो गयी। वहीं 1972 से लेकर अबतक मन्दिर पर चढ़ने वाले सोने चांदी के आभूषणों को सेवायत अपने घरों में ले गये। यही नही मन्दिर के नीचे स्थित तोषितखाने को खुलवाने के लिए 2013 में कोर्ट में 92 मन्दिर विवाद के तहत याचिका दायर कर रखी है। जिस पर कार्यवाही जारी है। ग्रामीण पिंटू शास्त्री ने कहाकि राधारानी मन्दिर के नाम करीब 1100 विघा जमीन थी लेकिन अब मात्र 600 विघा रह गयी है। 500 विघा जमीन सेवायत बेचकर खा गये। जबकि यह मन्दिर न तो किसी एक समाज का है। मन्दिर का निर्माण राजाओं ने करवाया था तथा जमीन भी सेवा पूजा के लिए दी। भरत पंडित ने कहाकि सालभर में राधारानी मन्दिर पर करीब तीन से चार करोड़ रुपये आते है लेकिन सारा पैसा सेवायतों की जेब मे जाता है। आजतक एक भी सामाजिक कार्य किसी भी सेवायत ने नही कराया। भरतसिंह एडवोकेट ने कहाकि मन्दिर पर भी भोग प्रसाद व व्यवथाओ के लिए श्रद्धालु दान देते है लेकिन मन्दिर पर आने वाले चढ़ावे का एक भी रुपया मन्दिर के विकास कार्य व श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च नही होता है। इस मौके पर नरेश राजपूत, गोविंद मुनीम, सतीश तोमर, राजेन्द्र हंस, दीपक सोनी, अमरदीप, राकेश शर्मा, कपिल शर्मा, राकेश बघेल, राम, विशाल शर्मा, हिरेश शर्मा, लक्ष्मण सैनी व प्रहलाद सहित आदि लोगो ने राधारानी मन्दिर पर भी श्राइन बोर्ड गठन की मांग सीएम योगी से की है।













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