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सारी सृष्टि ज्ञान से भरी हुई है: आचार्य स्वदेश

सारी सृष्टि ज्ञान से भरी हुई है: आचार्य स्वदेशवेद मंदिर में आयोजित हुआ मासिक सत्संग, श्रद्धालुओं ने दी आहुति

मथुरा। वर्तमान में हम जो कुछ हैं वह हमारे भूत का किया कराया है और भविष्य में हम जो कुछ होंगे वह वर्तमान में होगा वही होगा। जो कुछ हमारे सामने आता है वह अपने किये हुए कर्मों का फल होता है। 

उक्त विचार मसानी चैक स्थित गुरू विरजानंद आर्ष गुरूकुल वेद मंदिर में अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश महाराज ने मासिक सत्संग में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि प्रभू के भजन का अर्थ कि परमपिता परमात्मा की सृष्टि को समझना चाहिए। सारी सृष्टि ज्ञान से भरी हुई है, उससे हमें सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के जपने से दुख दूर नहीं बल्कि गायत्री मंत्र जो कहता है उसको जीवन में धारण करेंगे तो मुनष्य के निश्चित रूप से दुख दूर हो जायेंगे। आचार्य श्री ने कहा कि माता-पिता बच्चों को संवेदनशील बनायें। बच्चों को संस्कारित करें और चरित्रवान बनायें, तभी भारत फिर से विश्वगुरू का स्थान पा सकेगा। इससे पूर्व प्रातरूकाल की बेला में श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति प्रदान की। देवमुनि, उदयवीर सिंह व ब्रम्हचारी राष्ट्रबशु ने भजन प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विवेक प्रिय आर्य, योगेश आर्य, भानुप्रताप मलिक, संतोष आर्य, हरीसिंह आर्य, डा.अमरचंद आर्य, भगवान देव वानप्रस्थी सहित सैकडों श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। 

नारद संवाद

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