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मानवाधिकार आयोग की टीम पहुंची माधव के घर

पीड़ित पिता समेत पांच परिजनों के बयान आयोग ने किए दर(मुकेश कुशवाह)

पीड़ित पिता समेत पांच परिजनों के बयान आयोग ने किए दर

मथुरा। थाना हाइवे क्षेत्र स्थित मोहनुपर गांव में बदमाशों को पकड़ने गई पुलिस टीम की मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से बालक की मौत का मामला अभी थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। मामले की जांच करने के लिए लखनऊ से मानवाधिकार आयोग की चार सदस्यीय टीम ने मोहनपुर गांव पहुंच कर मृत बच्चे के परिजनों के बयान दर्ज करके घटना की जानकारी ली। बताते चलें कि विगत 18 जनवरी की शाम को मोहनपुर गांव के पास जंगल में बदमाशों की सूचना मिलने पर कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे थे। पुलिस को देखकर जुआ खेल रहे लोगों में  भगदड़ मच गई थी। उसी दौरान जुआरियों में से निकलकर चार संदिग्ध लोग पुलिस से बचने के लिए खेतों की ओर भागे थे। उस दौरान पीछा करते देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी,संभवत पुलिस ने भी बचाव में फायरिंग की थी। उसी दौरान वहां घर के पीछे खेत पर बेर खा रहे 8 वर्षीय माधव पुत्र अमरनाथ शर्मा निवासी मोहनपुर के सिर में एक गोली लग गई थी। परिणामस्वरूप अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मृत बालक के परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर गोली मारने का आरोप लगाया तो इसकी खबर लखनऊ तक पहुंची थी। मुख्यमंत्री के आदेश पर घटना की जांच करने पहुंचे आईजी रेंज राजा श्रीवास्तव ने प्रथमदृष्टया गोली चलाने का दोषी मानते हुए दरोगा वीरेन्द्र यादव और लापरवाही बरतने पर एक दरोगा तथा सिपाहियों को निलंबित कर दिया था। आईजी की जांच के साथ ही सीओ सदर और एसडीएम सदर भी इस मामले की जांच कर रहे हैं। बुधवार करीब शाम 3 बजे लखनऊ से अपर पुलिस अधीक्षक अमित मिश्र के नेतृत्व में मानवाधिकार की चार सदस्यीय टीम मोहनपुर गांव में मृत बालक के घर पहुंची। मानवाधिकार आयोग के अपर पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित परिजनों से घटना की जानकारी लेने के बाद जिस स्थान पर बालक माधव बेर खा रहा था,उस स्थान का निरीक्षण किया। इसके बाद मानवाधिकार आयोग की टीम ने घटना के संबधं में मृत बालक के पिता अमरनाथ के बयान लिए तो उसने कहा कि वह घटना के समय हुंडई शोरूम पर ड्यूटी कर रहा था,उससे कुछ लोगों ने कहा कि पुलिस वालों ने माधव को गोली मारी है,इसके बाद मृत बालक के दादा शिवशंकर शर्मा ने अपने बयान में कहा कि एक बाइक पर तीन पुलिस वाले आए थे,उन्होंने आते ही गोलियां चलाई थी,उन्होंने बयान में साफ कहा कि उनके पोते को पुलिस की गोली लगी है,हालांकि उन्होंने किसी भी पुलिसकर्मी का पहचानने और नाम बताने में असमर्थता जतायी हैं। वहीं माधव के चाचा पवन शास्त्री ने दिए अपने बयान में कहा कि जिस दिन घटना हुई थी,उस दिन वह अलवर में भागवत कर रहा था और भागवत का अंतिम दिन था,उसने बयान में कहा कि परिजनों ने उसे फोन करके घटना की जानकारी दी तो वह सीधे अस्पताल पहुंचा था,हालांकि उसने कहा कि लोगों ने उसे बताया था कि पुलिस ने गोली चलाई थी। इसके अलावा मानवाधिकार आयोग की टीम ने मृत बालक की मां लक्ष्मी देवी और दादी दर्शन देवी के भी बयान लिए हैं। इस संबधं में मानवाधिकार आयोग की टीम के प्रभारी अमित मिश्र ने बताया कि कोई भी व्यक्ति गुरूवार को भी उनके पास पहुंच कर अपने बयान दर्ज करा सकता है। 

 

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