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गमगीन माहौल में हुआ काबिना मंत्री के रिश्तेेदार का अंतिम संस्कार

गमगीन माहौल में हुआ काबिना मंत्री के रिश्तेेदार का अंतिम संस्कार

(मुकेश कुशवाह)

घटना के बाद छुट्टी रद्द कर एसएसपी वापस लौटे

रात्रि में ही किया एसएसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण

पुलिस टीमों ने हत्यारोपी परिवार के आधा दर्जन लोग लिए हिरासत में

मथुरा। कोतवाली छाता क्षेत्र स्थित दौताना और गोहारी के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर कैबिनेट मंत्री के समधी की हत्या के बाद रविवार को गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस नामजदों की तलाश में हरियाणा समेत दर्जनों संभावित स्थानों पर दबिशें दे रही है। घटना की सूचना के बाद परमीशन पर दो दिन की छुट्टी लेकर गए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रात्रि में ही वापस मथुरा पहुंच गए और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस टीमों को जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए है। पुलिस ने घटना के बाद रात्रि में दबिश देकर हत्यारोपियों के परिवार के आधा दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया है तथा उनसे पूछताछ जारी है। बताते चलें कि प्रदेश के दुग्ध विकास एंव धमार्थ कार्य मंत्री चैधरी लक्ष्मीनारायण के रिश्तेदार गोहारी के पूर्व प्रधान सरवन चौधरी पुत्र सुखीचन्द्र निवासी छाता के पास स्थित अपने फार्म हाऊस से पिछले शनिवार की शाम करीब 6 बजे बाइक द्वारा लौट रहे थे। उसी दौरान गोहारी-दौताना के बीच में पीछे से आए बाइक सवारों ने उन्हें निशाना बनाकर गोली मार दी। गोली पेट में से होकर दिल को फाड़ते हुए ऊपर की ओर निकली थी। घटना की जानकारी होते ही गंभीर घायल सरवन चौधरी को उपचार के लिए निजी अस्पताल में ले जाया गया था,जहां कुछ समय बाद ही उन्हें चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। मृतक के पुत्र महेन्द्र चौधरी छाता ब्लाॅक प्रमुख हैं। मृतक सरवन चौधरी काबिना मंत्री लक्ष्मीनारायण के छोटे भाई पूर्व एलएलसी लेखराज चौधरी के समधी थे तथा पूर्व एमएलसी के पुत्र जिला पंचायत सदस्य नरदेव चौधरी के ससुर थे। चिकित्सकों ने जैसे ही उनकी मौत होने की जानकारी परिजनों को दी तो उधर आक्रोशित ग्रामीणों ने दौताना के पास राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया था,करीब दो घंटे तक जाम लगने से हजारों वाहनों की कतार लग गई थीं। काबिना मंत्री लक्ष्मीनारायण के समझाने पर आक्रोशित लोगों ने जाम को खोला था। काबिना मंत्री के रिश्तेदार की सरेशाम हत्या की खबर मिलते ही लखनऊ में बैठे आलाधिकारियों के फोन खटकने लगे तो जैसे जिले के पुलिस अधिकारियों की सांसे फूल गईं। एसएसपी स्वप्निल ममगाई की अनुपस्थिती में उनका दायित्व संभाल रहे एसपी सिटी श्रवण कुमार सिंह छाता से लेकर नयति अस्पताल और फिर वहां से पोस्टमार्टमगृह तक मोर्चा संभाले रहे। घटना की जानकारी होने पर काबिना मंत्री लक्ष्मीनारायण और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा भी अस्पताल पहुंच गए थे,वहां श्रीकांत शर्मा ने सुरक्षा-व्यवस्था में ढिलाई बरतने पर अफसरों को खूब फटकार लगाई थी। रविवार को काबिना मंत्री के रिश्तेदार का दाह संस्कार किया,इस दौरान कई थानों का फोर्स और अफसर वहां मौजूद रहे। घटना की जानकारी होते ही दो दिन की छुट्टी पर गए एसएसपी स्वप्निल ममगाई शनिवार रात में ही वापस मथुरा पहुंच गए और आते ही घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा चार पुलिस टीमों को अतिशीघ्र हत्यारोयिों को दबोचने के आदेश दिए। घटना की रिपोर्ट मृतक के पुत्र देवेन्द्र सिंह ने सतीराम पुत्र रेखपाल,धर्मवीर और प्रदीप पुत्रगण राधाचरण निवासीगण गांव गोहारी,छाता तथा दो अज्ञात के खिलाफ हत्या के आरोप में दर्ज करायी है। पुलिस टीमों ने रिपोर्ट होते ही संभावित स्थानों पर दबिश देकर हत्यारोपियों के परिवार के करीब आधा दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया है,उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं पुलिस टीमें हरियाणा,राजस्थान और मथुरा में हत्यारोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिशें दे रही हैं। संभावना है कि जल्द ही हत्यारोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे। 

 

 

21 साल पुरानी रंजिश में एक ही पक्ष के चौथे व्यक्ति को उतारा गया है मौत के घाट

 

वर्श 1997 में ट्रैक्टर विवाद के बाद किया गया था तिहारा हत्याकांड

 

अदालत में विचाराधीन मुकदमें की सुनवाई के अंतिम चरण में की गई चौथी हत्या

 

मथुरा। काबिना मंत्री के रिश्तेदार तथा जिला पंचायत सदस्य भतीजे नरदेव चैधरी के ससुर सरवन चौधरी के परिवार से हत्यारोपियों की 21 साल से रंजिश चली आ रही है। इसी रंजिश में काबिना मंत्री के रिश्तेदार समेत चार लोगों की अभी तक हत्या की जा चुकी है। रंजिश का शुरूआती कारण इतना छोटा था कि किसी को इसका आभास तक नहीं था,यह रंजिश खूनी रूप धारण लेगी। बताते हैं कि वर्ष 1997 में गांव गोहारी में हत्यारोपी पक्ष का गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति से ट्रैक्टर को लेकर झगड़ा हुअ था,उस दौरान मृतक सरवन चैधरी के पिता सुखीचन्द्र और चाचा खचेरा सिंह ने एक व्यक्ति पर बेवजह दबाव बनाने वाले हत्यारोपी पक्ष का विरोध किया था। उस समय झगड़ा तो शांंत हो गया था लेकिन हत्यारोपी पक्ष के लोग मृतक सरवन चौधरी के परिजनों से रंजिश मानने लगे थे। इसी का नतीजा था कि वर्ष 1997 में ही हत्यारोपी पक्ष के लोगों ने सरवन चैधरी के पिता सुखीचन्द्र और खचेरा सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी तथा उस समय घटनास्थल पर पहुंचे बालिकराम प्रजापति पुत्र अमरी प्रजापति निवासी गोहारी को भी हत्यारोपी पक्ष ने गोली मारकर मार डाला था। एक साथ तिहरे हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक पहुंची थी। बताया जाता है कि तिहरे हत्याकांड का मामला अदालत में विचाराधीन है तथा जल्द ही अदालत इस पर फैसला सुनाने वाली है। अदालत में चल रहे मुकदमे के दौरान ही हत्यारोपी पक्ष ने कोर्ट का फैसला आने से पहले ही एक बार फिर रंजिशन चौथी हत्या करके लोगों में खौफ पैदा करने का प्रयास किया है। 

 

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