देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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संत सम्मेलन में बोले संत-
मूर्तिपूजा का विरोध करने वाले मोतियाबिन्द के शिकार
विग्रह साक्षात भगवान के स्वरूप,
युवा पीढ़ी में संस्कार जरूरी, मातायें निभायें अपनी जिम्मेदारी
वृन्दावन। प्रियाकान्तजू मंदिर पाटोत्सव पर शांति सेवा सभागृह में आयोजित संत सम्मेलन में वक्ताओं ने युवापीढ़ी को सनातन धर्म और संस्कारों से भटकाने वाले कारकों पर चर्चा की। वहीं संतों ने श्रोताओं को हिन्दुत्व विचारधारा को आगे रखने की सीख दी। सम्मेलन में मूर्ति पूजा का विरोध करने वालों को लोगों को मोतियाबिंद का शिकार बताते हुये बीतराग संत गोविन्दानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि विग्रह पत्थर नहीं होता उसमें वेदमंत्रों के द्वारा प्राण प्रतिष्ठा से साक्षात भगवान का आव्ह्ान किया जाता है।
महामण्डलेश्वर चित्तप्रकाशानंद महाराज ने कहा कि जब लोग मंदिर की मूरत में भगवान को देखते हैं लेकिन मंदिर के बाहर पीड़ित इंसानों में भगवान नहीं देखते तब मूर्तिपूजा पर सवाल उठाने वालों को बल मिलता है।
प्रख्यात भागवत प्रवक्ता धर्मरत्न देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने कहा कि लोग पूछते हैं कि केन्द्रीय विद्यालयों में हिन्दु पद्धिति से ही प्रार्थना क्यों होती है ? सनातन धर्म के ऐसे बुरे दिन भारत में ही आ सकते हैं। कोई यह नहीं पूछता कि क्या पाकिस्तान, अमेरिका, चीन जैसे देशों में हिंदुत्व पद्धिति से बच्चों को प्रार्थना करायी जाती है ? भारत में ही अगर हिन्दुत्व पर सवाल उठाये गये तो हम कहाँ अपनी बात कहेगें ? यही विचारधारा है जो कि सम्पूर्ण विश्व में शांति और सद्भाव की कामना करती है।
इससे पूर्व दाऊदयाल महाराज ने कहा कि आजकल नया चलन है कि युवक-युवतियाँ विवाह से पूर्व ही प्रीवैडिंग के नाम पर एक दूसरे के साथ बाहर समय बिताते हैं और फोटो शूट कराकर विवाह संस्कार करते हैं। क्या यही हमारी संस्कृति थी ? इसमें भी कहीं ना कहीं उन माता-पिताओं का दोष है जो आधुनिकता के नाम पर बेटे-बेटियों को इतनी स्वतन्त्रता देते हैं ।
नागेन्द्र दत्त काष्र्णि महाराज ने कहा कि संतो के बताये मार्ग पर चलकर संस्कृति और संस्कार मिल सकता है । बालमुकुन्द शास्त्री ने कहा कि राष्ट्र समाज और परिवार की उन्नति में सहयोग देने वाले लोगों का ही जीवन सार्थक है। सम्मेलन में महामण्डलेश्वर नवलगिरि महाराज, डा0 आदित्यानंद महाराज, महन्त हरिबोल महाराज, मोहिनीशरण महाराज, अशोक व्यास, अशोक शास्त्री, विपिन बापू, मंहत अमरदास, अभिषेककृष्ण शर्मा, राधाकान्त शास्त्री, नेत्रपाल शास्त्री, बिहारी लाल वशिष्ठ आदि ने अपने विचार व्यक्त किये ।
मंच संचालन आचार्य बद्रीश महाराज ने किया । विश्व शान्ति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट के सचिव विजय शर्मा ने आभार व्यक्त किया । इस अवसर पर एच.पी. अग्रवाल, धमेन्द्र कुमार धन्नू भईया, आर.के. जैन, राजेश सिंह, श्यामसुन्दर शर्मा, रवि रावत, जगदीश वर्मा, चन्द्रप्रकाश शर्मा, इंद्रेश, धर्मेन्द्र आदि उपस्थित थे ।













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