देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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भाई दूज पर यमुना के घाटों पर बहिनों ने की भाईयों की आरती
मथुरा। यमुना के विश्राम घाट पर यमद्वितीया पर्व को लेकर शनिवार सुबह से ही भाई बहिनों का सैलाब उमड़ पड़ा। शहर में जगह-जगह जाम देखने को मिला। इस जाम के झाम में पुलिस प्रशासन भी असफल दिखाई दिया। पुलिस की सख्ती से कई श्रद्धालुओं में रोष देखने को मिला। शहर में हर जगह बैरीकेटिंग के चलते श्रद्धालुओं को यमुना नदी में स्नान के लिए दूसरे रास्ते का प्रयोग करना पड़ा। जिसके चलते श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाई दूज का त्यौहार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है, यह त्यौहार दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है इस दिन यमराज देवता की पूजा भी की जाती है। यमुना अपने भाई से मिलने के लिए व्याकुल थी, तो इस दिन यम देव ने अपनी बहन यमुना के दर्शन दिए कि आज यमद्वितीया के दिन जो भाई बहिन एक साथ यमुना नदीं में नहाएंगे उन्हें सुखों की प्राप्ति होगी। इस स्नान को जमजतिया स्नान भी कहा जाता है।
पतित पावनी यमुनाजी में लाखों श्रद्धालु भाई-बहिनों द्वारा एक साथ डुबकी लगाकर यम की फांस से मुक्ति की कामना की गई। घर-घर बहिनों द्वारा भाईयों के माथे पर टीका करने और उपहार लेने की धूम रही। मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बाहर से आये श्रद्धालुओं के कारण शहर में गहमा गहमी रही। ब्रजवासियों के अलावा बाहर से आये श्रद्धालुओं का अर्द्धरात्रि के बाद से ही यमुना के घाटों की ओर जाना प्रारम्भ हो गया, सुबह होते-होते श्रद्धालुओं की भीड़ में वृद्धि होती गयी। श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ का दबाव विश्राम घाट पर रहा। श्रद्धालु भाई-बहिन एक दूसरे का हाथ पकड़े यमुना में स्रान करते हुए प्रसन्न चित्त नजर आ रहे थे और अपने आपको धन्य मान रहे थे। इस दौरान जै यमुना मैया के जयकारे गुंजायमान हो रहे थे। स्रान करने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा सूर्यनारायण को जल चढ़ाया तथा माँ यमुनाजी महारानी की दुग्ध, पेड़ा, दीप, धूप, पुष्प आदि से पूजा अर्चना की गयी। इसके पश्चात बहिनों द्वारा भाईयों के माथे पर टीका कर भोजन कराया गया। भाईयों द्वारा बहिनों को उपहार प्रदान करते हुए उनके सम्मान को बनाये रखने का वचन दिया गया। यमद्वितीया पर्व को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन तथा नगर पालिका परिषद द्वारा व्यापक व्यवस्थायें की गई थी। स्रानार्थियों को गहरे पानी में जाने से रोकने को बल्लियां लगाकर बैरीकेटिंग की गई थी। नावें लगाई गई थी। स्रानार्थियों को बार-बार लाउडस्पीकर से चेतावनी दी जा रही थी। नगर पालिका परिषद द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से नाव, गोताखोरों की व्यवस्था की गई थी। जिसमें कुछ नावों द्वारा प्रशासनिक अधिकारी निरंतर गश्त कर मेले पर नजर रख रहे थे। घाटों पर विशेष सफाई के साथ प्रकाश की समुचित व्यवस्था की गई थी। सहायता शिविर में कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे। वहीं पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के साथ ही यातायात की माकूल व्यवस्थायें की गई थी। विश्रामघाट पर प्रवेश व निकास द्वार बनाये गये थे। मोटर वोट से तैराक निरंतर गश्त करते हुए स्रानार्थियों पर नजर रख रहे थे। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने कड़े बंदोवस्त किये गये थे। विश्राम घाट व अन्य घाटों की ओर जाने आने वाले मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था।













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