देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा। योगीराज में कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ गयी है। 7 माह तक माता-पिता की हत्या और लूट के अपराधियों को स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा न खोल पाने और पीड़ित बच्चों को मिल रही प्रताड़ना से तंग आकर दम्पत्ति की सबसे बड़ी बेटी 20 वर्षीय राखी ने कल जहरीला पदार्थ खा कर आत्महत्या कर ली।
बड़े शर्म की बात है कि इस घटना को लेकर राष्ट्रीय लोकदल सहित तमाम विपक्षीयों और समाज सेवियों ने धरने, आंदोलन, भूख हड़ताल की थी। एसएसपी से लेकर छोटे अधिकारियों ने भी हत्यारों की गिरफ्तारी की अनेको बार हामी भरी लेकिन पुलिस प्रशासन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया। रालोद कहती है कि अपराधियों का पता लग जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासन उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाया। पीड़ित परिवार के बचे दो बेटी और एक बेटे प्रशासन के द्वार आकर धरने-प्रदर्शन पर महीनों बैठे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।
हद तो तब हो गयी जब इस दम्पत्ति की सबसे बड़ी बेटी को 2 अक्टूबर को किसी लड़के ने लगातर फोन कर तंग करना शुरू कर दिया। इन्हीं सभी झंझावतो में उलझी माता-पिता की मौत से दुखी सबसे बड़ी लड़की राखी 20 वर्ष ने कल बोझिल मन से इस दबंगों की दुनिया से विदाई ले ली। जिस किसी ने यह खबर सुनी सभी का कलेजा पसीज गया। नेता से लेकर जनमानस तक इस मौत से पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर थू-थू कर रहा है। रक्षा करने वाले लोगों से दुहाई करते-करते एक बेटी ने भी आखिर हारकार इतना बड़ा कदम उठा लिया। अब इस परिवार में दो बहन-भाई दीपा 14 वर्ष और राहुल 17 वर्ष अकेले रह गये है। उनकी जान को खतरा बना हुआ है। जिन हत्यारों ने मां-बाप को मार दिया और जिस पुलिस प्रशासन पर सुरक्षा का जिम्मा था वह कुछ नहीं कर सका। बड़ी बेटी ने जीवनलीला समाप्त कर ली। आखिर अब इस परिवार के इन बच्चों का क्या होगा? यह सवाल आज जन-जन की जुबान पर है। आपको याद होगा कि 8 मार्च 2017 की रात्रि को थाना हाईवे की अमर काॅलोनी में बदमाशों ने पति-पत्नी बनवारीलाल और रविवाला की बेरहमी से हत्या कर दी थी और घर से लाखों की लूट की थी। तभी से इस हत्याकांड को लेकर राष्ट्रीय लोकदल के नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह, ताराचंद गोस्वामी, काॅलोनी के लोग, समाजसेवी संगठन इस घटना के खुलासे को लेकर जिले के कलैक्टर और पुलिस कप्तान से खुलासे की मांग करते आ रहे थे। काफी समय तक मृतक दम्पत्ति के पुत्र और दो पुत्रियों ने उम्मीद लगाई कि पुलिस प्रशासन उनके माता-पिता के हत्यारों को सजा दिलायेगा लेकिन पुलिस प्रशासन मामले को उलझाता रहा। तमाम जांच-पड़ताल होती रही लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। आये दिन पुलिस के अधिकारी घटना के खुलासे के दावे करते रहे। जब परिणाम कुछ नहीं आया और मृतक दम्पत्ति के बच्चे खतरा महसूस करने लगे तो राष्ट्रीय लोकदल ने जिला मुख्यालय पर भूख हड़ताल और धरने दिये। पुलिस प्रशासन ने इन धरनों को लेकर नेताओं को समझाया-बुझाया और आश्वासन दिलवाया कि जल्द ही घटना का खुलासा कर देंगे।
यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को मुआवजा देंगे लेकिन फूटी कौड़ी भी उपलब्ध नहीं कराई। नेताओं ने आक्रोश जताया। बच्चों को खतरे का वास्ता दिलाया तब गूंगी-बहरी पुलिस ने दो सिपाही जरूर सुरक्षा के लिए लगा दिये लेकिन हत्यारे गिरफ्तार नहीं हो पाये। आज 8 अक्टूबर को घटना को पूरे 7 माह हो गये। 8 मार्च 2017 की रात्रि को ही दम्पत्ति की हत्या हुई थी और इसी दिन बड़ी बेटी राखी ने भी अपनी जीवनलीला समाप्त की है। यह ऐसी कहानी है जो प्रजातंात्रिक भारत में राजनीति और अफसर शाही की धज्जियां उड़ाती है और संकेत देती है कि पुलिस प्रशासन किसी गरीब की रक्षा और सुरक्षा के प्रति कितनी लापरवाह है।
हत्या का खुलासा तो दूर इस घटना ने उन मासूम बच्चों पर इतना बड़ा असर फोड़ा कि उन्हें पुलिस प्रशासन के न्याय मे ही धोखा नजर आने लगा और अपनी जिदंगी असुरक्षित महसूस होने लगी। तभी तो बीएससी की छात्रा राखी जो इस परिवार की सबसे बड़ी सदस्य है उसने ऐसा कदम उठाया। जिले के पुलिस और प्रशासन पर इसका कोई जवाब नहीं है।













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