देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। शारदीय नवरात्रि महोत्सव आज से शुरू हो गया। इस मौके पर देवी मंदिरो मे प्रातः से ही श्रद्धालु महिला-पुरूषों की भीड़ रही। नवदुर्गा पर मंदिरों मे पूजा-अर्चना का क्रम बड़े ही भक्ति भाव से चलता रहा। माता के दरबारों मे उनके जयकारे गूंजते रहे। आज से नवरात्रि शुरू हो रही है। प्रमुख मंदिरो मे कल से ही सफाई व्यवस्थायें कर ली गयी थीं। नवरात्रि व्रत और माता के पूजन मे महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। मंदिरो मे अच्छी खासी भीड़ रही। शहर के प्रमुख महाविद्या मंदिर पर देवी मां की पूजा अर्चना करते श्र(ालु देखे गये। ऊंचे टीले पर विराजमान मां महाविद्या का शास्त्रो मे भी लेख है। पौराणिक मान्याताओं के मुताबिक कभी मां के दरबार के बाहर शेर पहरा देते थे। जंगल मे मंदिर होने के कारण इसकी अलग ही छठा थी।
देश की प्रमुख देवी तीर्थो मे महाविद्या देवी का अलग ही महत्व है। मंदिर की आकर्षण प्रतिमाएं काफी प्राचीन है। आज नवरात्रि के अवसर पर मंदिर के बाहर शहनाई और नगाड़े की धुन गूंज रही थी। श्रद्धालु सुबह से ही मां के दरबार मे पूजा-अर्चना को पहुंच रहे थे। चामुण्डा देवी मंदिर मथुरा की ऐतिहासिक धरोहर है। मां चामुण्डा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आज श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। जलाभिषेक और पुष्पो से मां की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु उनकी जय-जयकार कर रहे थे। ब्रज के प्रमुख देवी मंदिरो मे कंकाली मां मंदिर की भी अपनी अलग पहचान है। वह भी एक प्रमुख सिद्ध स्थल है। माता के भक्तों का आज दरबार मे पूजन अर्चन और जयकारो ने पूरे परिसर को भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत कर दिया। श्रद्धालु एक के बाद एक पूजा-अर्चना कर रहे थे। मां से अपनी मुरादे मांग रहे थे तो वही ऐतिहासिक स्थलो मे एक धर्म और पुराणो मे लेखित प्रमुख सरस्वती कुंड मंदिर पर भी श्र(ालुओं द्वारा पूजा-अर्चना की जा रही थी। मां सरस्वती की भव्य और दिव्य प्रतिमा और जगत के पालक श्रीहरि विष्णु और मंगल मूर्ति गणेश की अद्भुत छवि हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। प्रातः काल से ही श्रद्धालु भक्त पूजा अर्चना कर रहे थे। मां सरस्वती दरबार मे शांति सद्भाव और कला की अद्भुत छटा देखते ही बनती है। शहर के मसानी स्थित पथवारी देवी मंदिर पर भी आज शारदीय नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु महिला-पुरूष पूजा अर्चना कर मां की जय-जयकार कर रहे थे। पथवारी मंदिर की भी अलग मान्यता है। दूर-दूर से लोग मां के दरबार मे मत्था टेकते है। गायत्री तपोभूमि स्थित मां गायत्री के दर्शन नौ रात्रि मे विशेष फलदायक माने जाते है। हवन, दर्शन का क्रम सुबह से ही जारी रहता है। शहर के भैंस बहोरा स्थित कैला देवी मंदिर और रंगेश्वर स्थित काली मां मंदिर पर भी आज सुबह से ही श्रद्धालुओ की भारी भीड़ रही। मां के दर्शन पूजा-अर्चना करती महिलाए उनसे आशीर्वाद मांग रही थी। शहर के चर्चिका देवी मंदिर, मंगनी माता मंदिर, कैंट वाली काली मां मंदिर, मां चन्द्रावली देवी मंदिर गोकुल और वृंदावन स्थित कात्यायनी मां मंदिर के अलावा छाता की नरी सेमरी मंदिर और नंदगांव स्थित साचैली वाली देवी मंदिर पर भी आज सुबह से श्रद्धालुओ का तांता लगा रहा। मां से अपनी मुरादे मांगने वालो की लंबी लाइने थी। पूजा-अर्चना करने वाले भक्त महिलाये, पुरूष और बच्चे प्रातः काल से ही मां के दरबार मे उनको षाष्टांग दण्डवत और नमन कर रहे थे। पूजा-अर्चना का क्रम और मां की जयकारो की गूंज देवी मां के भक्ति वाले गीत गूंज रहे थे।













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