देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान पर श्रीराधाष्टमी महोत्सव भाव, उल्लास एवं श्रद्धा के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान संस्थान सचिव कपिल शर्मा, हिन्दूवादी नेता गोपेश्वर चतुर्वेदी एवं संयुक्त मुख्य अधिशाषी राजीव श्रीवास्तव की देखरेख में धूमधाम से मनाया गया।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में स्थित भगवान श्रीकेशवदेवजी महाराज के मनोहारी श्रीविग्रह के राधा रुप में दर्शन करके भक्तजन आनंदित हो उठे। भागवत भवन में शहनाई की मधुर ध्वनि पर स्थानीय श्रद्धालुओं के स्वर से स्वर मिलाते हुए देश-विदेश से पधारे हजारों-हजार श्रद्धालुओं ने श्रीराधाजी के जन्म पर सुंदर बधाई गायन किया। पुष्पवर्षा के मध्य भाव विभोर होकर नृत्य करते हुए श्रद्धालु मजीरे की थाप, हरिनाम संकीर्तन, सुमधुर ध्वनि में शहनाई वादन सबकुछ श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बरसाना धाम की अनुभूति करा रहा था। साथ ही केशवदेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने बधाई में उपहार भी वितरित किए।
श्रीराधाष्टमी के मुख्य आयोजन का शुभारंभ प्रातरू से ही भागवत भवन मंदिर में श्रीगणेश, श्रीनवग्रह आदि के पूजन के उपरान्त श्रीराधा सहस्त्रार्चन का पाठ गुलाब के पुष्पों के साथ किया गया। पुष्पार्चन के उपरान्त श्रीराधाजू की प्राकट्य आरती हुई। इसके उपरान्त भागवत भवन में स्थित श्रीराधाकृष्ण मंदिर में हुआ श्रीराधा जी का जन्माभिषेक। जन्माभिषेक के मध्य शास्त्रीय मंत्रों की गूंज, शहनाई, नगाड़े, ढोल, झांझ, मजीरे, एवं मृदंग की ध्वनि से झूमते-नाचते श्रद्धालु संपूर्ण वातावरण को भावमय कर रहे थे। श्रद्धालुओं से खचाखच भरे भागवत भवन में निरंतर पुष्प एवं मालाओं की बरसात हो रही थी। दिव्य श्रंृगार, पोशाक एवं पुष्प सज्जा के मध्य विराजमान युगल सरकार श्रीश्यामा-श्याम जू की छवि प्रभू के साक्षात दर्शन का आभास करा रही थी। भक्तों हेतु श्रीकृष्ण-जन्मस्थान परिसर में स्थित श्रीकेशवदेव मंदिर के निकट प्रातरू बाल भोग एवं अभिषेक के उपरान्त पंचामृत प्रसाद के साथ-साथ वृहद मात्रा में बधाई रुप में प्रसादी भंडारे का आयोजन देर सायं तक किया गया।













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