देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More51 किलो की कामधनु ने किया योगीराज का दुग्धाभिषेक
मथुरा। जन्मभूमि में आधी रात से ही माहौल कृष्णमय हो गया। रात 11 बजकर 55 मिनट पर मंदिर के पट खुल गए। 12 बजे जैसे ही श्रीकृष्ण का जन्म हुआ मंदिर के पुजारियों ने उनका अभिषेक किया। इसके बाद उन्हें दुध और दही से नहलाया गया। बाल गोपाल के जन्म के बाद उन्हें पंचामृत से स्नान करवाया गया। इसमें सभी तीर्थों के जल थे। इनमें गंगा, यमुना सहित देश की सभी नदियों और समुद्र का जल शामिल था। कान्हा के जन्मोत्सव के पश्चात 51 किलोग्राम की चांदी की गाय से निकलते दूध से बालकृष्ण का दुग्धाभिषेक किया गया। जाएगा। इसके बाद ठाकुरजी रेशम, जरी, सिल्क एवं रत्न प्रतिकृति से बनी कुसुम वेलि पोशाक धारण कराई गई। इस दौरान ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरा, घंटे, तालियां और मृदंग की गड़गड़ाहट गूंजती रही। बालगोपाल को पाग, पंजीरी का भोग लगाया गया। कीर्तन से पूरी जन्मभूमि गुंजायमान रही। श्रृंगार के साथ ही उनकी आरती हुई। इसी के साथ मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव शुरू हो गया। शंख, ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरा और मृदंग तेजी से बजने लगे। लाखों भक्त झूमते हुए कृष्ण की भक्ति में लीन हो गए। वे प्रसाद और चरणामृत के लिए बहुत उतावले हो रहे थे। रत्न जड़ित रेशम की पोशाक में बालकृष्ण की अलौकिक छवि देखते ही बन रही थी। हर तरफ इत्र और फूलों की बरसात हो रही थी। चारों तरफ ‘नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ गूंजता रहा। साथ ही, लगातार कृष्ण लीलाओं का मंचन होता रहा, जिसे देख लोग भाव विभोर हो उठे। जन्मभूमि में भक्तों का उत्साह उफान पर था। मथुरा के भागवत भवन स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थली जाने के लिए हर कोई आतुर था। कार्यक्रम के प्रारम्भ में गुरूशरणनन्द तथा महंत नृत्य गोपाल दास का स्वागत महोत्सव समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण दास अग्रवाल, संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, डा. चन्द्रभान गुप्त, गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, गिरीश चन्द अग्रवाल, आदि ने माल्यार्पण कर दिया।













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