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जन्म से लेकर मृत्यु तक काम आती है वृक्षों से मिलने वाली लकड़ी
हरे वृक्षों की रक्षा करने का लें संकल्प
मथुरा। ब्रज को और अधिक खूबसूरत बनाने के लिए यमुना मिशन द्वारा चलाई जा रही मुहिम महावृक्षारोपण अभियान के अन्तर्गत अपने असंख्य कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वरिष्ठ जनों, साधु-संतो, अधिकारियों एवं सामाजिक संस्थानों का भरपूर सहयोग हमें मिल रहा है। प्रतिदिन वृक्षारोपण करना संभव नही है, लेकिन कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा शक्ति यदि आपके पास है तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं। इसी दृढ़ इच्छा शक्ति के संचार से यमुना मिशन के संयोजक पं. अनिल शर्मा अपने दल-बल के साथ ऐसे आयोजन कर जनमानस को जागरुक करने का कार्य हमेशा करते रहते हैं। न कोई चंदा न कोई स्वार्थ, हो राष्ट्र सुंदर यही यमुना मिशन का प्रयास।
इसी दृढ़ इच्छा शक्ति के चलते मसानी मोक्षधाम स्थित यमुना मिशन मार्ग पर महावृक्षारोपण अभियान चलाया गया। महावृक्षारोपण अभियान की शुभारंभ प्रेमाजगत गुरू श्री शंकराचार्य स्वामी शारदानंद महाराज, आचार्य योगेश प्रभाकर, गीता साध्वी, मीना सिंह, प्रेमलता, रामदास जी महाराज, रघुनाथ उपाध्याय, सौरभ शुक्ला, ब्रज वृन्दावन एक्ट नॉव से अंबिका दासी, हरीदेई, सत्यजीत प्रभु, सहित 9 विदशी भक्तों ने भी वृक्षारोपण किया।
महावृक्षारोपण अभियान के अवसर पर यमुना मिशन के संयोजक पं. अनिल शर्मा की धर्मपत्नी गीता शर्मा ने कहा कि वृक्ष तो हमारे जीवन में महत्वपूर्ण हैं ही, लेकिन वृक्षों से मिलने वाली लकड़ी का भी हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। जन्म से लेकर मृत्यु तक हमें लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने कहा कि बचपन में लकड़ी से बने खिलौने से खेलते हैं। चूल्हा चलाने के लिए लकड़ी, हाथ-पैर टूटने पर बैसाखी भी लकड़ी की, मारने-पीटने के लिए भी लकड़ी, मरणोपरांत मृत देह को जलाने के लिए भी लकड़ी का महत्वपूर्ण योगदान है। अगर आप लोग भी लकड़ी के महत्व को समझ गए हों तो अधिक से अधिक संख्या में प्रतिदिन वृक्षारोपण करें और ब्रज की इस धरा को हरियाली युक्त बनाने में यमुना मिशन के सहयोग करें। हरे भरे वृक्षों को न पहुंचाए कोई नुकसान और उनकी रक्षा करने का भी लें संकल्प।
इस अवसर पर यमुना मिशन के संयोजक पं. अनिल शर्मा, श्रीमती गीता शर्मा, साध्वी गीता, हरीश शर्मा, दाऊदयाल, देवेन्द्र शर्मा, मुकेश ठाकुर, देवेश चौधरी, गोपाल लाल, मनीष सक्सैना, मोनू पंडित, राजीव शर्मा, हरीमोहन, गोविन्दा ठाकुर, सतीश ठाकुर, सचिन गोला, मदन मोहन, भोलू उस्ताद, गोपाला इत्र, मदन मोहन राजपूत, मदन व्यास, मोनू सैनी, ठा. मानपाल सिंह, योगेश ठाकुर, शिवम, गोपाल, राजू, भीम आदि उपस्थित थे।













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