BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं नंे लगाई यमुना में डुबकी

गंगा दशहरे पर लोग यमुना में स्नान करते हुए मथुरा। गंगा दशहरा के पर्व पर आज भोर से ही श्रद्धालुओं ने यमुना में डुबकी लगाकर अपने को धन्य माना। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ यमुना के विभिन्न घाटों पर देखी गयी। जगह-जगह पुलिस प्रशासन और नगर पालिका द्वारा इस मौके पर बैरीकेटिंग और सुरक्षा व्यवस्थायें की गयी थीं। खोया-पाया शिविर, चिकित्सा शिविर और श्रद्धालुओं की सुविधार्थ स्वयंसेवी संगठन यमुना किनारे मौजूद देखे गये। गंगा दशहरा पर्व को ध्यान में रखते हुये विभिन्न धार्मिक संगठनों की मांग के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा यमुना में गंगा का जल छुड़वाया गया था। यमुना काफी समय से मैली चल रही थी और इस पर्व पर श्रद्धालुओं के सामने भी यह गंदगी सामने न आये, इसके लिये प्रशासन द्वारा अतिरिक्त जल छुड़वाया गया था। माथुर चतुर्वेद परिषद, तीर्थ पुरोहित महासंघ जैसे विभिन्न संगठनों ने इसमंे प्रशासन का सहयोग किया। नगर पालिका द्वारा बैरीकेटिंग, सफाई और अन्य व्यवस्थायें करायी गयीं। सुबह से ही श्रद्धालुओं द्वारा यमुना में डुबकी लगाई गयी। महिला, पुरूष, बच्चे गंगा दशहरा पर यमुना में स्नान, जलेबी-कचैड़ी का नाश्ता और खरबूजे, तरबूजे घरों में लेकर पंहुचे। आज के दिन मथुरा में पतंगों का भी चलन रहा है। सुबह से ही आसमान पर रंग-बिरंगी पतंगे उड़ाते बच्चे, वृद्ध और महिलायें देखी गयीं। तो दानी सज्जनों द्वारा इस मौके पर मीठे जलों की प्याऊ शहर के विभिन्न छोरों पर लगाई गयीं। पुण्य के भाव से यह सेवा जगह जगह लोगों द्वारा की गयी थी जिसका श्रद्धालुओं ने खूब लाभ उठाया। गंगा दशहरा के मौके पर पुलिस-प्रशासन द्वारा यमुना के घाटों पर पूरी व्यवस्थायें की गयी थीं। शहर कोतवाली पुलिस और दूसरे थानों से भी पुलिस भेजी गयी थी।

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More