देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा । द्वारिकाधीश बगीचा संचालन समिति के सदस्यों की बैठक में निर्णय लिया गया कि इस बगीचे का ऐसा स्वरूप विकसित किया जायेगा कि यह पवित्र स्थान ब्रज की संस्कृति और श्रीकृष्ण की लीलाओं का मनोरम दर्पण बन जायेगा। ब्रज की संस्कृति बहुत समृद्ध है और वृन्दावन में आने वाले श्रद्धालुओं के इस संस्कृति के एक स्थल पर एक साथ दर्शन कराना हमारा लक्ष्य होगा। उन्होंने बताया कि द्वारिकाधीशजी के बगीचे में श्रीकृष्ण की माखनचोरी की लीला, चीरहरण लीला, कालियानाग दमन लीला, ब्रजकी होली, सुदामा चरित्र, श्रीकृष्ण का महारास, राधाकृष्ण लीला, गोपी उद्धव संवाद आदि लीलाओं, नाटिका एवं लोकगीत, लोकनृत्य का मंचन किया जायेगा। इससे ब्रज के कलाकारों को रोजगार भी मिलेगा साथ ही उनकी कला विश्व में फैलेगी। ब्रज की सांझी कला, मल्लविद्या, मल्लखंभ, ज्योतिष, ब्रज का भोजन, मंदिरों का प्रसाद, साधु-संतों का प्रवचन आदि एक स्थान पर उपलब्ध कराया जायेगा।
बगीचा संचालन समिति की बैठक में यह भी बताया गया कि इस संबंध में सांसद हेमा मालिनी को भी प्रस्ताव भेजा गया है। समिति सदस्य राजीव अग्रवाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक धरोहर को यथारूप में संरक्षित रखते हुये इसके विकास की योजना का लक्ष्य है।













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