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हिसार । कुटेल गांव में जन्मी 24 वर्षीय हिमानी को करनाल जिले की पहली महिला पायलेट बनने का गौरव प्राप्त नही हो सका। अपनी ट्रेनिंग की आखिरी उड़ान के पंद्रह मिनट बाद ही एयरक्राफ्ट हादसे का शिकार हो गया। इस फ्लाइट के बाद हिमानी का कोर्स कम्प्लीट हो जाता ओर वह करनाल जिले की पहली महिला पायलट बनती। जिससे हिमानी के पैतृक गांव कुटेल में मातम पसर गया, जहां उसको ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
महाराष्ट्र के गोङ्क्षदया के बिरसी हवाई अड्डे से बुधवार सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर ट्रेनी पायलेट हिमानी कल्याण ने अपने ट्रेनर के साथ उड़ान भरी थी। हिमानी दो साल से ट्रेनिंग ले रही थी और उसकी ट्रेनिंग की यह आखिरी उड़ान थी। तीन घंटे बाद वह पायलट बनने वाली थी लेकिन किस्मत को कुछ ओर ही मंजूर था। उड़ान भरने के लगभग 15 मिनट बाद ही मध्यप्रदेश स्थित बालाघाट से 65 किलोमीटर दूर लावनी और महाराष्ट्र के देवरी गांव के बीच ट्रेनी एयरक्राफ्ट वैनगंगा नदी में क्रैश हो गया।
हिमानी के परिजनो से मिली जानकारी के अनुसार इस फ्लाइट के बाद हिमानी का कोर्स कम्प्लीट हो जाता ओर वह करनाल जिले की पहली महिला पायलट बनती । परिजनों ने बताया कि एयर क्राफ्ट के उड़ान भरते ही चन्द मिनट में प्लेन क्रैश हो गया । हिमानी के पिता एयर फोर्स से रिटायर हो चुके है और अब इंडिगो एयर लाइंस में कार्यरत है । पिछले कई दशकों से दिल्ली के द्वारका मोड पर रह रहे थे। हिमानी के पिता का सपना था कि उसकी बेटी पायलट बने । गुरुवार की दोपहर हिमानी का शव उसके पैतृक गांव कुटेल में लाया गया । अपनी होनहार बेटी की मौत की खबर सुनकर पूरे गांव में मातम पसर गया । हिमानी का अंतिम संस्कार कुटेल गांव में किया गया सभी ग्राम वासियो ने उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
साभार-khaskhabar.com













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