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मुंबई । अब भी भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। समझा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव के बाद दोनों दलों के बीच की क़डवाहट कम होगी लेकिन ताजा रिपोर्टो पर अगर गौर करें तो भाजपा गठबंधन से अलग होकर मध्यावधि चुनाव की तरफ जा सकती है। निकाय चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद भाजपा को लगता है कि मध्यावधि चुनाव में वह अकेले दम बहुमत पा सकती है।
प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी की यहां गुरूवार शाम हुई बैठक में मध्यावधि चुनाव सहित कई संभावित परिदृश्यों पर विचार किया गया। भाजपा में मौजूद एक सूत्र ने बताया, सत्तारूढ शासन में शिवसेना के साझेदार नहीं रहने की स्थिति में उपजने वाले राजनीतिक परिदृश्य पर बैठक में चर्चा हुई। सूत्र ने बताया कि मध्यावधि चुनाव के लिए व्यवहार्यता पर चर्चा की गई। सूत्र ने बताया कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में नकारात्मक टिप्पणियों सहित पार्टी की अन्य हरकतों के खिलाफ कार्रवाई पर आमराय है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन और महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन ने राज्य में पार्टी को मजबूत किया है। सूत्र ने कहा कि कुछ विधायकों के अन्य पार्टियों को छोडने और भाजपा के टिकट पर फिर से चुने जाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में शरीक होने वाले नेताओं में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस भी शामिल हैं। यह बैठक राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल के आधिकारिक आवास पर हुई।
गौरतलब है कि साल 2014 का विधानसभा चुनाव भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग लडा था। भाजपा सबसे बडे दल के रूप में उभरी थी। इसके कुछ महीनों बाद शिवसेना भगवा गठबंधन में लौटी थी लेकिन मनचाहा विभाग पाने में नाकाम रही थी। महाराष्ट्र और केंद्र में भाजपा का सहयोगी दल रहने के बावजूद शिवसेना ने सरकार की नीतियों पर हमला जारी रखा। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी तंज कसे। स्थानीय निकाय चुनाव में शिवसेना और भाजपा के बीच संबंध बदतर हो गए, ये चुनाव उन्होंने अलग-अलग लडे।
साभार-khaskhabar.com













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