देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा । बसंत पंचमी के साथ से ब्रज में होली की शुरुआत हो गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ब्रज के सभी मंदिरों एवं चौराहों पर होली का प्रतीक लकड़ी का टुकड़ा गाड़ दिया जाता है। उसके बाद मंदिरों में प्रतिदिन होली के गीत गाए जाते हैं। ये सिलसिला पूरे 45 दिन तक चलता है।श्रद्धालु वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर पहुंचे। परंपरा के अनुसार मंदिर में श्रृंगार आरती के बाद सबसे पहले मंदिर के सेवायत पुजारी ने भगवान बांके बिहारी को गुलाल का टीका लगाकर होली के पर्व की विधिवत शुरुआत की।श्रद्धालुओं पर सेवायत पुजारियों ने जमकर बसंती गुलाल उड़ाया। हर तरफ सिर्फ गुलाल ही गुलाल नजर आ रहा था।
साभार-khaskhabar.com













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