देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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कराची । भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली इस समय जबरदस्त फॉर्म में हैं। कोहली क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट (टी20, वनडे, टेस्ट) में बल्ले से चमक बिखेर रहे हैं। कई विशेषज्ञ उन्हें मौजूदा दौर का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बताते हैं। कोहली जिस तरह से रनों की बरसात करने में लगे हुए हैं उसे देखते हुए उनकी तुलना मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से भी की जाने लगी है।
इस बीच, पाकिस्तान के दाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ ने कहा है कि वे सचिन को कोहली से बेहतर खिलाड़ी मानते हैं। यूसुफ ने एक इंटरव्यू में कहा कि मैं कोहली से कुछ छीनना नहीं चाहता। वह असाधारण प्रतिभा है। लेकिन मैं सचिन को कहीं ऊपर आंकता हूं क्योंकि वे जिस युग में खेले, सर्वश्रेष्ठ टीमों, तेज गेंदबाजों और स्पिनरों के खिलाफ खेले। उन्होंने कहा कि आजकल खिलाडिय़ों का स्तर वह नहीं है जो 90 के दशक में और 2011 तक था। 2011 विश्व कप के बाद स्तर गिरा है। सचिन विश्व स्तरीय खिलाड़ी थे और इसका आकलन सभी हालात और सभी प्रारूप में मजबूत प्रतिद्वंद्वी टीमों के खिलाफ उनके रनों और शतकों से किया जा सकता है। यूसुफ ने कहा, मैं सचिन के खिलाफ काफी खेला और वे विश्व स्तरीय थे और कई बार मैच विजयी पारी खेली। मुझे नहीं लगता कि कोहली को उसी स्तर के गेंदबाजों या विरोधी टीमों का सामना करना पड़ रहा है।
मुंबई। भारत की विश्व कप विजेता टीम के कप्तान और ऑलराउंडर कपिल देव को यहां क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (सीसीआई) में पूर्व भारतीय कप्तानों अजीत वाडेकर, सुनील गावसकर और नारी कांट्रेक्टर की मौजूदगी में लीजेंड्स क्लब ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल किया गया। विश्व कप 1983 में भारत की जीत के दौरान टीम की कमान संभालने वाले कपिल को देश का सर्वश्रेष्ठ हरफनमौला खिलाड़ी माना जाता है।
पूर्व भारतीय खिलाड़ी और लीजेंड्स क्लब के अध्यक्ष माधव आप्टे ने कपिल को प्रशस्ति पत्र देखकर सम्मानित किया। टेस्ट क्रिकेट में 10000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज गावसकर को भी वाडेकर ने प्रशस्ति पत्र दिया। गावसकर को 11 जुलाई 2013 में ही क्लब के हाल ऑफ फेम में शामिल किया जा चुका है। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए कपिल ने कहा कि इस देश में ऐसा कोई नहीं है जो सुनील गावसकर नहीं बनना चाहता। काफी लोग आएंगे लेकिन यह नाम (सुनील) हमेशा शीर्ष पर रहेगा। हमारे अंदर खेल के लिए जुनून था और हम पुरस्कारों या किसी और चीज पर ध्यान नहीं देते थे। उस समय हमारे अंदर काफी जुनून था। अगर हमारी सफलता से लोगों को खुशी मिलती है तो हमें गर्व होता था।
साभार-khaskhabar.com













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