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1.76 LAKH CRORE : RBI के फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, मोदी सरकार पर साधा निशाना

1.76 LAKH CRORE : RBI के फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, मोदी सरकार पर साधा निशाना


नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय बोर्ड द्वारा बिमल जालान पैनल की सिफारिशें स्वीकार करने और लाभांश तथा अधिशेष भंडार से 1.76 लाख करोड़ रुपए केंद्र सरकार को देने का निर्णय लेने के अगले दिन मंगलवार को कांग्रेस ने इस कदम की निंदा की है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार ने देश को आर्थिक आपातकाल में धकेल दिया है।

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार के दबाव में आरबीआई ने सीमा क्रॉस की है और इसका नतीजा भयावह हो सकता है। आरबीआई के समूचे सरप्लस को एक बार में ही सरकार को देने का निर्णय लिया गया है। इसमें पिछले एक साल की आरबीआई की आय भी शामिल है। बेरोजगारी ने कमर तोड़ दी है।

निर्यात पांच साल पहले के स्तर पर है, सरकार के पास निवेश करने को पैसा नहीं, बैंकों के पास कर्ज देने को रकम नहीं। ऐसे में आरबीआई ने ऐसा निर्णय लिया जो खतरे की घंटी है। सरकार की नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लगातार बदहाल किया है। हमारी जीडीपी में लगातार कमी आ रही है। पिछली तिमाही में यह महज 5.8 फीसदी रही है। औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग ढह गई और इसमें ग्रोथ महज 1.2 फीसदी रह गई। 

इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया था कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के पास उनके खुद के द्वारा बनाए गए आर्थिक संकट का कोई समाधान नहीं है। आरबीआई से चोरी करने से काम नहीं चलेगा। यह डिस्पेंसरी से एक बैंड-एड खरीदकर गोली लगने के घाव पर लगाने जैसा है। 

कांग्रेस के मीडिया प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस कदम को राजकोषीय आत्महत्या बताया और पूछा कि क्या यह सिर्फ संयोग है कि बजट की गणना में गायब राशि और आरबीआई से उधार ली गई 1.76 लाख करोड़ की राशि बराबर है। उन्होंने इसके बाद इशारा किया कि यह राशि भाजपा के करीबी मित्रों को बचाने के लिए है। 

पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट किया, आरबीआई के अधिशेष भंडार के 1.76 लाख करोड़ रुपए को आरबीआई के अधिशेष के 1.76 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानांतरित करना चाहिए क्योंकि यह राशि सरकार पहले ही व्यय कर चुकी है और क्या बिमल जालान समिति सिर्फ एक रबर स्टांप है।
साभार-khaskhabar.com

 

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