देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreदेश की आबादी के 58 प्रतिशत हिस्से की कमाई का प्राथमिक स्रोत खेती है। इसीलिए किसानों के लिए खेती से जुड़े ढांचे का विकास करना और फसल के उत्पादन के बाद बेहतर ढांचागत सुविधा देना शुरुआत से ही सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है। अब इसी में आगे बढ़ते हुए सरकार द्वारा कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत जो 1 लाख करोड़ रुपए का कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड दिया गया था अब उसका उपयोग एपीएमसी यानि कृषि उपज मंडियां भी कर सकेंगी।
इसके साथ-साथ राज्य सरकार और राष्ट्रीय स्तर की जो कोऑपरेटिव या स्व-सहायता फेडरेशन हैं वो भी इसकी पात्रता की सूची में आयेंगी। इससे देश में मौजूद मंडियों को मजबूती मिलेगी और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इसको लेकर कहते हैं कि निश्चिन्त रहिये एपीएमसी खत्म नहीं होंगी बल्कि और मजबूत होंगी। कृषि उपज मंडी को करोड़ों रुपयों का साधन भारत सरकार की ओर से इस इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की मदद से उपलब्ध करवाया जायेगा जिससे वह सशक्त होंगी।
क्या किये गए हैं बदलाव?
-अभी तक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर ये प्रावधान था कि अगर कोई व्यक्ति, संस्था, सहकारी समिति, एफपीओ या एग्री-स्टार्टअप, किसानों का समूह अगर संरचना बनाएंगे तो उसके लिए 2 करोड़ रुपये तक का लोन और इसके ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज की छूट होगी, लेकिन अब अगर व्यक्ति एक से अधिक प्रोजेक्ट करना चाहे तो उसके लिए उसे सभी प्रोजेक्ट के ब्याज पर छूट दी जाएगी।
-निजी क्षेत्र की इकाई के लिए ऐसी परियोजनाओं की अधिकतम सीमा 25 होगी और ये अलग-अलग गांव क्षेत्र में होने चाहिए।
– नए संशोधनों के मुताबिक, इन सभी प्रोजेक्ट को अलग-अलग 2 करोड़ पर ब्याज पर छूट की पात्रता रहेगी।
– इसके साथ मंडी का जो परिक्षेत्र है या कृषि उपज मंडी, जिस पूरे कमांड क्षेत्र में काम करती है, उस कमांड क्षेत्र में अगर वह एक से अधिक परियोजनाएं अपने किसानों के लिए बनाएंगी तो वह भी इस फंड का उपयोग कर सकती हैं।
-एक और बात, राज्य सरकार की जो एजेंसियां हैं, फेडरेशन हैं उन पर ये 25 प्रोजेक्ट वाली योजना लागू नहीं होगी।
-कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत वित्तीय सुविधा की अवधि 2025-26 तक 4 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दी गई है और 2032-33 तक इस योजना की कुल अवधि 10 से बढ़ाकर 13 वर्ष कर दी गई है।
क्या है कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड?
दरअसल, कोरोना वायरस महामारी में सुस्त होती अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल विभिन्न सेक्टरों के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। इसी घोषणा में शामिल था एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड। इस फंड की शुरुआत खेती से जुड़ी ढांचागत सुविधाओं जैसे कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, पैकेजिंग यूनिट वगैरह के अभाव को देखते हुए की गयी। इसके तहत किसानों के लिए एक लाख करोड़ रुपए तक के ऋण की व्यवस्था की गयी है। इसमें अलग-अलग प्रोजेक्ट के हिसाब से मध्यम-अवधि यानि मीडियम और लंबी-अवधि यानी लॉन्ग टर्म के लिए फाइनेंस सुविधा यानि कर्ज मुहैया कराया जाता है।
यह फंड कैसे मिलता है?
प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठन और कृषि उद्यमी समेत बैंक और वित्तीय संस्था, प्राथमिक कृषि कर्ज सोसाइटी, मार्केटिंग सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह, संयुक्त जवाबदेही समूह, बहुउद्देशीय सहकारी समितियां, कृषि से जुड़े स्टार्ट-अप्स और केन्द्रीय/राज्य एजेंसियां या सार्वजनिक-निजी साझेदारी परियोजना प्रायोजित स्थानीय निकायों को ये एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड मुहैया करवाया जाता है। कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की मॉनिटरिंग एक ऑनलाइन मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम के जरिए की जाती है। इस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ही फंड के लिए आवेदन भी किया जा सकता है।
किसानों को इस फंड से क्या फायदा है?
सरकार किसानों की इनकम दोगुना करने के वादे पर बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। कृषि इंफ्रास्ट्रचर फंड का दायरा बढ़ाने से देश के और अधिक किसानों को उनकी फसल के लिए ज्यादा पैसे मिलेंगे और उनकी इनकम बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ देश में अगर कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा तो किसान के पास फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों के रखने के लिए बेहतर भंडारण की सुविधा होगी। कोल्ड स्टोरेज में किसान अपनी फसल रख पाएंगे। इससे फसलों की बर्बादी कम होगी और उचित समय पर उचित कीमत के साथ किसान अपनी फसल बेच पाएंगे और हर साल होने वाले नुकसान से उन्हें राहत मिलेगी।













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