देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreएक तरफ धागे हैं जो उलझ कर और भी "करीब" आ जाते हैं एक तरफ रिश्ते हैं, जो..जरा सा उलझते ही "टूट" जाते हैं!l आखिर क्यों.... क्योंकि धीरे धीरे सब स्वार्थी होते जा रहे है। फिर यही कहूंगा कलयुग की गति है जिसे कोई नही रोक सकता। क्योंकि वरदान ही ऐसा मिला है उसे।













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