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बदलते मौसम में फूड प्वाइजनिंग की बढ़ जाती है संभावना, जानें कारण, लक्षण व उपचार

कोरोना वायरस के संक्रमण के अलावा बदलते मौसम में खुद का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। कभी तेज धूप और कभी बारिश कई बीमारियों को लेकर आते हैं। ऐसे में दूषित भोजन का सेवन फूड प्वाइजनिंग की समस्या का कारण बन सकता है। क्या होते हैं इस समस्या के लक्षण और कैसे फूड प्वाइजनिंग की समस्या से निजात पाया जा सकता है, इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ से प्रसार भारती ने चर्चा की।

जीबी पंत अस्पताल के प्रो. (डॉ.) सिद्धार्थ श्रीवास्तव बताते हैं कि फूड प्वाइजनिंग का अर्थ है खराब भोजन का सेवन करने से उल्टी, दस्त, बुखार या तेज पेट दर्द की समस्या आती है। कई बार ये बैक्टीरिया, वायरस की वजह से भी समस्या उत्पन्न होती है।

खाने तक कैसे पहुंचते हैं बैक्टीरिया या वायरस?

जब खाना बनाते वक्त साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, खाना बनाने वाला अच्छी तरह से हाथ न साफ करें, खाना खाने से पहले हाथ धुलना भूल गए या शौच के बाद साबुन से हाथ नहीं धुले हैं, अगर सब्जी और फलों को अच्छी तरह से नहीं धुलने पर भी फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।

फूड प्वाइजनिंग होने पर क्या करें?

अगर किसी को फूड प्वाइजनिंग हो गई है, तो इलाज में सबसे पहले उसके शरीर से पानी की कमी को दूर करना है। पानी पीने में दिक्कत हो रही है, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है।

खूब पानी पीएं, कम मात्रा में कई बार खाना खाने की आदत डालें। अगर दस्त बहुत ज्यादा हो, बुखार हो, डिहाइड्रेशन के लक्षण आने लगे, गर्भवती हैं, उम्र 70 साल से ज्यादा या 10 साल से कम है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

बचाव के उपाय

खाना बनाने और खाने से पहले अच्छी तरह से हाथ धुलना है। उन सब्जी और फलों को अच्छी तरह से धुलें जिन्हें कच्चा खाना है। नॉनवेज खाते हैं तो मांस और मछली को पूरी तरह से पकाएं, कच्चा मांस, मछली बहुत ज्यादा फूड प्वाइजनिंग कर सकते हैं। अंडा अगर बना रहे हैं तो उसके अंदर के पीले भाग को सख्त होने तक खूब पकाएं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ के मुताबिक साफ है कि भोजन बनाने, परोसते और खाते समय स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना है, जिससे फूड प्वाइजनिंग से बचा जा सके।

नारद संवाद

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