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जानें, मशहूर चाइल्ड गारमेंट्स कंपनी काइटेक्स ने क्यों कहा केरल को बाय-बाय, कंपनी अब तेलंगाना में करेगी निवेश

केरल की काइटेक्स गार्मेंट्स (Kitex Garments) कंपनी अब अपना राज्य छोड़कर तेलंगाना जाने की तैयारी कर चुकी है। यह बच्चों के कपड़े बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। कंपनी ने कहा है कि वह तेलंगाना में 1000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। तेलंगाना के स्टेट इंडस्ट्रीज एवं कॉमर्स मिनिस्टर केटी रामा राव ने 9 जुलाई को इसके बारे में जानकारी भी दी थी। इस ऐलान से एक दिन पहले ही कंपनी ने ऐलान किया था कि वह केरल की निवेश योजना से पीछे हट रही है। कंपनी का कहना था कि राज्य के अधिकारी कंपनी का शोषण कर रहे हैं।

विवाद की वजह क्या है?
झगड़े का कारण एर्नाकुलम जिले के कोच्चि के पास किजक्कम्बलम में काइटेक्स निर्माण इकाई और कंपनी परिसर में श्रम और स्वास्थ्य सहित विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा एक महीने के भीतर कई बार जांच करना माना जा रहा है।

काइटेक्स गारमेंट्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक साबू एम जैकब ने आरोप लगाया कि निरीक्षण उनके जैसे उद्यमियों को “परेशान” करने और उन्हें दबाने के लिए की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी का निरीक्षण करने आए अधिकारियों ने ऐसा व्यवहार किया जैसे वे चोरों और लुटेरों को पकड़ने आए हों। उन्होंने आगे कहा कि उनकी अंतरात्मा उन्हें अपने राज्य केरल में फिर कभी एक रुपया भी निवेश करने की अनुमति नहीं देगी।

हालांकि, राज्य के उद्योग मंत्री पी राजीव ने स्पष्ट करते हुए कहा कि कंपनी की जांच किसी सरकारी आदेश के माध्यम से नहीं की गई है और न ही उद्योग विभाग द्वारा कोई आदेश जारी किया गया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और श्रम विभागों द्वारा की गई जांच केरल उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेशों के अनुपालन में की गई। कोर्ट और आयोग ने व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर जांच का आदेश दिया था। इन शिकायतों में कथित तौर पर कंपनी द्वारा श्रमिकों के साथ किया जा रहा व्यवहार और पास की नदी में बढ़ती गंदगी के मुद्दों को उठाया गया था।

जांच के बाद क्या हुआ?
जांच के नतीजे अभी नहीं आए, इससे पहले ही, जैकब ने जनवरी 2020 में ASCEND शिखर सम्मेलन में घोषित किए गए 3,500 करोड़ रुपये के केरल में निवेश को वापस लेने की घोषणा करके सबको चकित कर दिया। निवेश का उद्देश्य 2025 तक प्रस्तावित आर्थिक गलियारे के साथ कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और पलक्कड़ में एक टेक्सटाइल पार्क और औद्योगिक पार्क स्थापित करना था, जिससे हजारों नौकरियां पैदा होने की संभावना थी। राज्य सरकार में सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना, जैकब ने आरोप लगाया कि राज्य में व्यापार के विकास के लिए अनुकूल माहौल का अभाव है। उन्होंने कहा कि वह केरल में प्रस्तावित निवेश को छोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन राजनीतिक और नौकरशाही उत्पीड़न के चलते उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। उन्होंने आगे कहा कि जहां देश के अन्य राज्य बड़े व्यवसाय के लिए अपने इको-सिस्टम को अपग्रेड कर रहे हैं, वहीं केरल अभी भी 50 साल पीछे है।

पिछले हफ्ते, जैकब, काइटेक्स के कुछ अधिकारियों के साथ, तेलंगाना सरकार द्वारा भेजे गए एक निजी विमान से हैदराबाद गए, जहां वे राज्य के उद्योग मंत्री के टी रामा राव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल से मिले। दो दिनों की चर्चा के बाद, कंपनी ने वारंगल के काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क में 1,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की।

केरल सरकार ने क्या कहा ?
सीएम पिनाराई विजयन ने राज्य के कारोबारी माहौल का बचाव करते हुए कहा कि सरकार, राज्य में उद्यमियों और निवेशकों को सहज महसूस कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि नीति आयोग द्वारा तैयार किए गए सतत विकास सूचकांक में केरल पहले स्थान पर है। इसके साथ ही उन्होंने पिछले पांच वर्षों में अपनी सरकार द्वारा किए गए उपायों के बारे में बताते हुए कहा कि जिला-स्तरीय विवाद निवारण मंचों की स्थापना, निरीक्षण के लिए केंद्रीकृत प्रणाली और परियोजनाओं की फास्ट-ट्रैक मंजूरी के लिए एक बोर्ड की स्थापना सरकार ने की है। राज्य के उद्योग मंत्री पी. राजीव ने कहा कि कंपनी की तरफ से अभी तक आधिकारिक सूचना उन्हें नहीं मिली है।उन्होंने आगे कहा कि सरकार हर तरह से बातचीत और विवाद सुलझाने के लिए तैयार है।

काइटेक्स समूह का महत्व
60 के दशक में स्वर्गीय एमसी जैकब द्वारा स्थापित काइटेक्स समूह, दुनिया में बच्चों के कपड़ों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। कंपनी कपड़ों के अलावा एल्युमीनियम उत्पाद, सब्जी मसाले और स्कूल बैग भी बनाती है। यह केरल के औद्योगिक परिदृश्य में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा नियोक्ता है, माना जाता है कि यह समूह लगभग 10,000 लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

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