BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

जनजातीय समुदाय को मुख्य धारा से जोड़ने का सरकार कर रही है हर संभव प्रयास

चाहे शिक्षा की बात हो या रोजगार की, भारत सरकार जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। हमेशा से जनजातीय मामलों के मंत्रालय के कार्यक्रमों और योजनाओं का उद्देश्य अन्य केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और आंशिक रूप से स्वैच्छिक संगठनों के समर्थन और वित्तीय सहायता के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों को मुख्य धारा से जोड़ना है। पिछले कुछ सालों से विभिन्न योजनाओं के जरिए आदिवासियों के उत्थान का पूरा प्रयास कर रही है। चाहे एकलव्य आवासीय विद्यालय हो या वन धन विकास योजना, इन सब का उद्देश्य जनजातीय समुदाय का कल्याण ही है।

स्कूल नवाचार दूत प्रशिक्षण कार्यक्रम
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कुछ दिनों पहले ही संयुक्त रूप से 50,000 स्कूल शिक्षकों के लिए ‘स्कूल नवाचार दूत प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का शुभारंभ किया। स्कूल नवाचार दूत प्रशिक्षण कार्यक्रम (एसआईएटीपी) बच्चों की रचनात्मकता को नई ऊंचाई देगा और एक मंच प्रदान करेगा ताकि वे अपने विचारों से दुनिया को कुछ नया दे सकें। शिक्षकों के लिए इस अद्वितीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के बीच रचनात्मकता, सहयोग, महत्वपूर्ण सोच और संचार कौशल के विकास को प्रमुखता दी गई है। इसका उद्देश्य 50,000 स्कूल शिक्षकों को नवाचार, उद्यमिता, आईपीआर, डिजाइन थिंकिंग, उत्पाद विकास, विचार सृजन आदि के बारे में प्रशिक्षण देना है। यह प्रशिक्षण केवल ऑनलाइन माध्यम से दिया जाएगा।

कोविड टीका संग सुरक्षित वन, धन और उद्यम अभियान
इसके अलावा भारत के जनजातीय समुदायों में कोविड टीकाकरण की गति को बढ़ाने के लिए ‘कोविड टीका संग सुरक्षित वन, धन और उद्यम’ अभियान शुरू किया गया है। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने इसका शुभारंभ किया। यह अभियान, भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था, भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड) के 45,000 वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) की सुविधाओं का लाभ उठाएगा। यह अभियान यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन की साझेदारी में शुरू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य 50 लाख से अधिक जनजातीय लोगों को कोविड टीकाकरण अभियान से जोड़ना है।

एकलव्य आवासीय मॉडल स्कूल
3-4 जुलाई, 2021 को केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड के तीन जिलों में 5 एकलव्य आवासीय मॉडल स्कूलों (ईएमआरएस) के निर्माण की आधारशिला रखी। ईएमआरएस जनजातीय मामलों के मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है और यह परिकल्पना की गई है कि ईएमआरएस में शिक्षा का स्तर जवाहर नवोदय विद्यालयों के बराबर होगा। ईएमआरएस की शुरुआत वर्ष 1997-98 में दूरस्थ क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए की गई थी ताकि वे उच्च और व्यवसायिक शैक्षिक पाठ्यक्रमों में अवसरों का लाभ उठा सकें और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर सकें। भारत सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2022 तक 50% से अधिक एसटी आबादी या कम से कम 20,000 आदिवासी व्यक्तियों वाले प्रत्येक ब्लॉक में एक ईएमआरएस होगा।

आदि-प्रशिक्षण पोर्टल
हाल ही में, 16 जून को केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने दिल्ली में आदि-प्रशिक्षण पोर्टल भी लॉन्च किया था। मंत्रालय द्वारा विकसित आदि-प्रशिक्षण पोर्टल जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई), मंत्रालय के विभिन्न प्रभागों, जनजातीय छात्रों की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय सोसायटी (एनईएसटी), जनजातीय मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित उत्कृष्टता केंद्र एवं राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान द्वारा संचालित सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के केंद्रीय भंडार के रूप में बनाया गया है। इसी दिन राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान और भारत सरकार के जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित तीन दिवसीय “एसटी पीआरआई सदस्यों के लिए मास्टर प्रशिक्षकों की क्षमता निर्माण प्रशिक्षण” कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया था।

1999 में जनजातीय समुदाय के लिए बनाया गया था अलग मंत्रालय
अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास पर अधिक केंद्रित दृष्टिकोण प्रदान करने के उद्देश्य से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के विभाजन के बाद 1999 में जनजातीय समुदाय के लिए अलग मंत्रालय की स्थापना की गई थी। संस्था निर्माण के माध्यम से आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक विकास वाली इन योजनाओं को मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जाता है और मुख्य रूप से राज्य सरकारों / केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है। यह मंत्रालय विशेष रूप से तैयार की गई योजनाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक हस्तक्षेपों के माध्यम से अन्य मंत्रालयों के प्रयासों को भी पूरक बनाता है।

‘ट्राईफूड’ देगा 10,000 से अधिक आदिवासी परिवारों को रोजगार
जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) का अपना ई-कॉमर्स पोर्टल www.tribesindia.com है जो जनजातीय उत्पादों का विपणन करता है। यह अमेजोन, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, पेटीएम, और जेम जैसे सभी प्रमुख ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर भी मौजूद है। ‘ट्राईफूड’ योजना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और ट्राइफेड की एक संयुक्त पहल है। इस योजना के तहत ट्राइफेड द्वारा छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और महाराष्ट्र के रायगढ़ में लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से तृतीयक मूल्यवर्धन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें से प्रत्येक मेगा-फूड पार्क व्यवसायिक रूप से प्रबंधित विनिर्माण और उत्पादन केंद्र के रूप में मूल्यवर्धन, विपणन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग संचालन को बढ़ाएगा और 10,000 से अधिक आदिवासी परिवारों को सीधे आजीविका प्रदान करेगा।

डिजिटल कनेक्ट कार्यक्रम की डायरेक्टरी का हो चुका है लोकार्पण
ट्राइफेड ने एक डिजिटल कनेक्ट कार्यक्रम भी शुरू किया है, जिसके तहत वन धन विकास योजना और ट्राइफेड के खुदरा संचालन से जुड़े सभी जनजातीय लाभार्थियों के साथ दोतरफा संचार प्रक्रिया स्थापित की जाएगी। इनके अलावा, ट्राइफेड की गतिविधियों में रुचि रखने वाले अन्य हितधारकों को भी ट्राइफेड की योजनाओं और गतिविधियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जनजातीय समुदाय की इन आजीविका सृजन पहलों का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करने के लिए शामिल किया जा रहा है। इस प्रकार की सभी जानकारी लिए केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा एक डायरेक्टरी का भी लोकार्पण कर चुके हैं।

आदिवासियों को अपनी उपज का मिल रहा है उचित मूल्य
उल्लेखनीय है कि आदिवासियों के सशक्तिकरण के लिए ट्राइफेड कई उल्लेखनीय कार्यक्रम लागू कर रहा है। पिछले दो साल में, ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के जरिये लघु वन उपज (एमएफपी) के विपणन के लिए तंत्र तथा एमएफपी के लिए मूल्य श्रृंखला के विकास’ से आदिवासियों की स्थिति व्यापक स्तर पर प्रभावित हुई है। एमएफपी के लिए एमएसपी के तहत, राज्यों ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 821.48 करोड़ रुपये सहित पिछले दो साल में भारत सरकार के 321.02 करोड़ रुपये और राज्य कोषों के 1,520.72 करोड़ रुपये का इस्तेमाल करते हुए कुल 1,841.74 करोड़ रुपये की खरीद की है। इससे आदिवासी संग्रहकर्ताओं को अपनी उपज के लिए उचित व लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से ज्यादा मूल्य पर बाजार खरीद बढ़ाने में मदद मिली है।

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्वतंत्रता सेनानी पं. हुकम सिंह गौतम की पुण्यतिथि मनाई

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More