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केंद्र ने गेहूँ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मामूली वृद्धि करके खानापूर्ती की : कैप्टन अमरिन्दर

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा गेहूँ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में किए 85 रुपए प्रति क्विंटल की मामूली वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुए रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामूली वृद्धि से खेती लागतों की कीमतों में हुई वृद्धि की भरपाई भी नहीं होगी।

केंद्र सरकार के इस फ़ैसले को खानापूर्ती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वृद्धि से किसानों की बड़ी समस्याओं का हल होना तो एक तरफ़ रहा, इससे संकट में डूबी किसानी को अंतरिम राहत मिलने की भी कोई उम्मीद नजऱ नहीं आती। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा 100 रुपए प्रति क्विंटल बोनस का ऐलान न करने पर सख्त आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने फ़सल काटने के बाद पराली का निपटारा करने के लिए यह बोनस देने की माँग बार-बार उठाई थी जिसको केंद्र ने कोई स्वीकृति नहीं दी।

उन्होंने कहा कि इससे पता लगता है कि मोदी सरकार किसानों का भला करने में बिल्कुल संजीदा नहीं जबकि देश भर के किसान बहुत बुरी स्थिति से गुजऱ रहे हैं और यहाँ तक कि कई किसानों ने खुदकुशी का रास्ता भी अपना लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूँ के भाव में की गई ताज़ा वृद्धि से राज्य सरकार की तरफ से की गई माँग की पूर्ति नहीं की गई। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्र द्वारा भाव में वृद्धि का किया गया ऐलान न तो संकट में डूबी किसानी की उम्मीदों पर खरा उतरा है और न ही स्वामीनाथन आयोग द्वारा पहचान की गई समस्या की जड़ को सुलझाने के लिए उपयुक्त बैठता है। उन्होंने एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को पूरी तरह अमल में लाने की माँग को दोहराया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार बाकी फसलों को न्युनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने को यकीनी बनाने के लिए भी नाकाम सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस तरफ़ ध्यान दे तो इससे जहाँ किसानों को गेहूँ और धान के फ़सलीय चक्कर जिससे पानी का स्तर गिर रहा है, में से बाहर निकाला जा सकेगा, वहीं किसानों की आय में भी फर्क पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के किसानों के प्रति संवेदनहीन रूख पर दुख ज़ाहिर करते हुए कहा कि पिछले पाँच सालों से अधिक समय के दौरान सत्ता में केंद्र सरकार ने किसानों की मुश्किलें दूर करने के लिए एक भी कारगर प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कजोंर् के बोझ के नीचे दबे किसानों का एक भी पैसा माफ नहीं किया जबकि इसके उलट पंजाब और अन्य राज्यों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने किसानी को राहत प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने अब तक राज्य के 5.61 लाख छोटे और सीमांत किसानों के 4609.08 करोड़ रुपए के कर्जों का निपटारा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे राज्य सरकार किसानों की तत्काल समस्याओं को हल करने के लिए अपने स्तर पर कोशिशें कर रही है परन्तु किसानों की मुश्किलों के स्थाई हल के लिए केंद्र सरकार द्वारा किसान समर्थकीय राष्ट्रीय नीति बनाने की जरूरत है।
साभार-khaskhabar.com

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