देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। यमुना की अविरलता और यमुना मुक्ति तथा शुद्धि के लिए मथुरा में होने वाले जोरदार आंदोलन पिछले कुछ वर्षों से नजर नहीं आ रहे हैं। यकायक इन आंदोलनों की रफ्तार थम सी गई है।
यहां तक वैष्णव पूर्व कुभ बैठक के दौरान भी कई बार साधु संतों ने यमुना के जल की शुद्धता को लेकर सवाल उठाये ेथे। बावजूद इसके कान्हा की नगरी से इस तरह की आवाजें अब उठना बंद हो गई हैं।
लम्बे समय से किसी आंदोलन की कोई गूंज कान्हा की नगरी में सुनाई नहीं दी है। जबकि जिस समय आंदोलन होते रहे थे उससे यमुना अब कहीं ज्यादा प्रदूषित है। हालांकि छुटपुट प्रयास अब भी जारी है।
यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए यमुना भक्तों द्वारा निकाली जा रही यमुना कलश पदयात्रा गुुरुवार को यमुनोत्री धाम से चलकर उत्तराखण्ड के टप्पू टिपरी पहुंची। यहां स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा का पदयात्रा का स्वागत किया। पड़ाव स्थल पर सभी पदयात्रियों ने देर शाम यमुनाष्टक का पाठ सामूहिक रुप से किया। गंगोत्री से शुुरु हुई यह यमुना कलश पदयात्रा 18 अप्रेल को मथुरा आएगी।
यमुना के उदगम स्थल से शुरु हुई यमुना कलश पदयात्रा बुधवार शाम को नांगल ,खुर्दपुर ,शाहपुर होते हुए अपने अगले पड़ाव टप्पू टिपरी पहुंची। हरिनाम संकीर्तन के साथ चल रही पदयात्रा का ग्राम प्रधान नफे सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने यमुना मैया के जयकारों के साथ आत्मनिर्भर प्रॉजेक्ट के संस्थापक रंजीत पाठक चतुर्वेदी सहित सभी पदयात्रियों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
अपने पड़ाव स्थल पर सभी पदयात्रियों ने मध्यान्ह विश्राम के पश्चात शाम को सामूहिक यमुनाष्टक का पाठ किया। यह यमुना कलश यात्रा 2 अप्रेल को अपने अगले पड़ाव विदौली के लिए प्रस्थान करेगी।
कलश यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए यमुना भक्त रंजीत पाठक चतुर्वेदी ने सभी यमुना भक्तों से मां यमुना महारानी के लिए कुछ कदम साथ चलने का आव्हान किया।
पदयात्रा का स्वागत करने वालों में नफे सिंह ,मुकेश नामदेव, सोनू वारी, किशन सिंह , सोवरण सिंह ,लक्ष्मी देवी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।













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