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मथुरा से गुजरा कामगारों का कारवां

मथुरा। लाकडाउन के बाद हरियाणा, दिल्ली, एनसीआर से निकला कामगारों का कारवां कान्हा की नगरी को खतरे में डाल गया। यहां भूखे प्यासे इन लोगों की भरपूर सहायता की गई, लेकिन अब यही लोग मथुरा के लिए मुसीबत बन सकते हैं। बताया जाता है कि पिछले तीन दिनों के दौरान 50 हजार से अधिक मजदूर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के रास्ते मथुरा से गुजरे हैं। इसमें 29 हजार की रवानगी तो बीते दिवस रविवार को हुई। ये सभी लोग मथुरा में न रुकते हुए अपने-अपने घरों के लिए पैदल और वाहनों से रवाना हो गए हैं।
 इन लोगों में कितने कोरोना संक्रमित थे इस का किसी को कुछ पता नहीं है। मुसीबत के मारे इन लोगों की मदद को कान्हा की नगरी के समाज सेवियों का दिल ऐसा पसीजा कि उन्होंने लाकडाउन के तमाम नियम कायदों को भी ताक पर रख दिया। सोसल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उडा कर रख दीं। यह कारवां तो गुजर गया लेकिन अब प्रशासन के हाथ पांव फूल रहे हैं। सोशल मीडिया पर समाजसेवी होने का दंभ भरने के लिए भी कुछ लोगों ने लाकडाउन का मजाक बना डाला। लोगों की मदद के नाम पर किसने क्या किया इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए लेकिन लोगों की मदद के नाम पर घरों से बाहर निकले लोगों ने खुद के साथ ही मानवता को भी खतरे में डाल दिया है। अब भी यह देखने को मिल रहा है कि लोग की मदद के नाम पर नेता और जनप्रतिनिधि लोगों की भीड एकत्रित कर रहे हैं और मास्का आदि का वितरण कर रहे हैं। बल्देव विधान सभा क्षेत्र से विधायक पूरन प्रकाश खुद ऐसा कर चुके हैं। दूसरे लोग भी समाज सेवी कह लाने की ललक में लाकडाउन का मजाक उडा रहे हैं।

प्रशासन की तैयारियों से समझें आने वाले खतरे की हकीकत
कोरोना वायरस से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कृष्णाकुटीर सहित 11 कॉलेजों के भवनों को अधिग्रहीत कर लिया है। सुनरख स्थित कृष्णाकुटीर को क्वारंटीन के लिए तैयार किया जा रहा है, जबकि कॉलेज भवनों को आश्रयगृह का रूप दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों को उपचार देने की योजना के तहत अपनाई जाने वाली क्वारंटीन की प्रक्रिया के लिए कृष्णाकुटीर का चयन किया है। वृंदावन के सुनरख स्थित कृष्णाकुटीर का अधिग्रहण कर लिया गया है। अब यहां 800 बेड की व्यवस्था होगी, जिससे यहां लोगों को क्वारंटीन किया जा सके।

 

नारद संवाद

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