देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमहिलाएं अगर ठान लें तो उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं होता है, अब तक जो तमाम कार्य पुरुषों के ही माने जाते रहे, आज उन सभी कामों में महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, बल्कि ये भी कह सकते हैं कि इस कोरोना के महासंकट के बीच ऐसे कार्यों में अपनी उच्च स्तरीय सहभागिता दिखाकर महिलाओं ने एक फिर बार सिद्ध कर दिया है कि देश की आधी आबादी हर कार्य करने में पूरी तरह से सक्षम है।
उत्पाद खरीद और भुगतान में निभाई अहम भूमिका
मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग के मुरैना जिले की महिलाओं ने भी ऐसा ही कुछ किया है, जिसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाएगी वह कम ही होगी। कोरोना काल में भी जिले के 19 महिला स्वयं-सहायता समूहों ने रबी उपार्जन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन स्व-सहायता समूहों ने जिले के 2,389 कृषकों से एक लाख 21 हजार 417 क्विंटल की खरीदी कराई है। खास बात यह है कि कृषकों के खातों में 23 करोड़ 97 लाख 99 हजार 396 रुपये का भुगतान भी कराया गया है।
आगे भी फसलों की खरीदी के लिए तैयार
जिले में स्वयं-सहायता समूह की महिलाएं रबी उपार्जन के खरीदी कार्य से प्रफुल्लित है और वे कह रही हैं कि इस प्रकार का कार्य आगे आने वाले खरीफ में भी हम करेंगे। इसमें 27 रुपये प्रति के हिसाब से शासन द्वारा समूह को राशि प्राप्त होती है, जो समूह में जुड़ी महिलाओं के लिये आत्मनिर्भर बनने के लिये कारगर सिद्ध हो रही है।
इस महिला स्वयं-सहायता समूहों समूह का कार्य रहा अग्रणी
मुरैना जिले में सबलगढ़ विकासखण्ड की ग्राम पंचायत लखनपुरा के ग्राम शिवलाल पुरा की 12 महिलाओं को जोड़कर बनाया गया, जय दुर्गा स्वयं-सहायता समूह कि महिलाओं ने अपने बल पर इस वर्ष रबी उपार्जन में 3700 क्विंटल गेहूं की खरीदी करवाई है। इस स्वयं-सहायता समूहों समूह की अध्यक्ष मीरा जाटव कहती हैं कि समूह का गठन करने के पीछे का उद्देश्य यही रहा कि हम ये बता सकें कि महिलाओं अब किसी के मोहताज नहीं हैं, महिलाएं हर काम को कर सकती है, जिस काम को पुरुष करते है, उस काम को महिलाएं भी पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निभा सकती हैं।
मीरा जाटव आगे कहती हैं कि मेरे द्वारा मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा 2014 में समूह का गठन किया गया था। समूह की महिलाओं ने कंधा मिलाकर अब तक लगातार कार्य किया है। सभी महिलाओं के बल पर हमने इस वर्ष रबी उपार्जन का काम हाथ में लिया, जिसमें खरीदी केन्द्र की पूरी जिम्मेदारियां महिलाओं ने संभाली।
ग्रामीण महिलाओं ने पोर्टल पर भी किया अपडेट
उन्होंने बताया कि हमने कंप्यूटर के माध्यम से किसानों को एसएमएस भेजे। एसएमएस भेजने के बाद खरीदी का कार्य प्रारंभ किया गया। शासन की गाइडलाइन के अनुसार एफएक्यू का परीक्षण किया, किसानों को टोकन दिये। टोकन के बाद गेहूं की तुलवाई कराई गई। मीरा कहती हैं कि हमारी इन्हीं महिला साथियों द्वारा ही बोरियों की सिलाई कर पोर्टल पर एंट्री किया और खरीदे गये गेहूं की एक या दो दिन में ट्रांसपोर्टेशन का कार्य लगातार करती गईं। जैसे ही ट्रांसपोटेशन होने के बाद किसान का नाम एंट्री होने लगा, बेचे गये गेहूं की राशि भोपाल से किसान के खाते में समय-समय पर भेजा गया।
हम्माली करने में भी पीछे नहीं रही महिलाएं
इसके साथ ही स्वयं-सहायता समूह की रामबेटी कहती हैं कि खरीदी केंद्र पर जिन्होंने हम्माली का कार्य किया था, उनका पैसा बराबर उनके खाते में प्राप्त हो रहा है। समूह को प्रति क्विंटल 27 रुपये कमीशन प्राप्त होगा, जो महिलाओं को स्वावलंबी बनने और उनके परिवार में खुशहाली लाएगा। आज महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
19 स्वयं-सहायता समूहों ने गेहूं खरीदी का किया कार्य
इस संबंध में मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वयक दिनेश तोमर कहते हैं कि जिले में 19 स्वयं-सहायता समूहों ने इस वर्ष रबी उपार्जन के दौरान गेहूं खरीदी का कार्य किया है।













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