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MATHURA : महिलाओं को मिले सम्मान और पहचान, तभी नवरात्रि सार्थकः राजेन्द्र प्रसाद

मथुरा। बाल और समाज कल्याण गतिविधियों को समर्पित संस्था आदर्श युवा समिति द्वारा आदिशक्ति माँ के नवअवतार स्वरूप में जनपद की मातृशक्ति को सम्मानित किया गया । कार्यक्रम में 11 युवती एवं महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग एवं नवाचार आदि क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुये ‘आदर्श सेवा रत्न’ का सम्मान प्रदान किया गया । गोविन्द नगर स्थित सर्वेश्वरी सदन में विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर यह आयोजन किया गया था । संस्था ने अपनी आदर्श संस्कार शाला परियोजना के अन्तर्गत इन मातृशक्तियों का देवी रूप में पूजनकर नारी सम्मान के लिये समाज के दायित्वों की पे्ररणा दी। इस अवसर पर 21 नवाचारी शिक्षकों को भी आदर्श शिक्षा रत्न पुरस्कार से संम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि रविशंकर सिंह, शिक्षाधिकारी निशेष जार, पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया, सांसद हेमामालिनी प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा, योग प्रशिक्षक गोपाल दीक्षित आदि ने सम्मानित जनों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया । कवि हरिबाबू ओम एवं गोपाल प्रसाद गोप ने काव्यपाठ कर आयोजन का शुभारम्भ किया ।
लड़कियों को स्कूटी सिखाने का अभियान चलाने वाली युवा उद्यमी और सामाजिक कार्यकर्ता पावनी खंडेलवाल, 84 वर्ष की आयु में बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहीं निर्मला शर्मा, महिला उद्यमिता प्रशिक्षण दे रहीं शिप्रा राठी, सिलाई सिखा कर परिवार का भरणपोषण करने वाली ग्रामीण युवती कुमारी रेनू, प्रशासनिक अधिकारी एवं बालअधिकार कार्यकर्ती रूमा वर्मा, ग्रामीण महिलाओं के हितों के लिए कार्यरत रचनेश एवं पिंकी देवी, आभा द्विवेदी (संगीत शिक्षक और प्रख्यात लोक गायिका), पिंकी, सेवानिवृत्त नर्स पार्वती वर्मा एवं ठाकुरजी की पोशाक का स्टार्टअप चलाने वाली शालिनी उपाध्याय को सम्मानित किया गया ।  
विशिष्ट अथिति रविशंकर ने पुरातन शिक्षा प्रणाली को अमल में लाये जाने की आवश्यकता बताते हुये कहा कि आधुनिक शिक्षा पद्धिति से बच्चों की सीखने की क्षमता में कमी आयी है। विज्ञान, गणित जैसे विषयों पर आज का विद्यार्थी दूर भागता है जबकि पुरातन शिक्षा प्रणाली में खेल और कविताओं के माध्यम से ही विद्यार्थी इनके कठिन सूत्र समझ सकता है ।
संस्था संस्थापक राजेन्द्र प्रसाद गोस्वामी ने कहा कि नवरात्रि में शक्ति आराधना सही अर्थों में तभी सार्थक होगी जब हम समाज में महिलाओं को सम्मान एवं पहचान दे सकें । जनार्दन शर्मा ने कहा कि बालिका शिक्षा को लेकर सांसद हेमामालिनी सदैव सहयोगी रही हैं। वह स्वंय महिला सशक्तिकरण का उदाहरण हैं। जिन सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिये फर्नीचर की आवश्यकता है वह सांसद कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं ।
लखनऊ से आयीं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रूमा वर्मा ने कहा कि संस्थाओं को ग्रामीण परिवेश की कठिन परिस्थितियों में विशिष्ट कार्य कर रहीं महिलाओं को आगे लाना चाहिये । जिससे अन्य महिलायें भी प्रेरित होकर आत्मनिर्भर बन सकें। इस अवसर पर एस.के. गर्ग, अतुल उपाध्याय, गुरूप्यारी सक्सैना, रेखा दीक्षित, पंकज शर्मा, अनुपम गौतम, मनोरमा शर्मा, नरेन्द्र एम. चर्तुवेदी, आकाश राघव, मफतलाल अग्रवाल, जगदीश वर्मा ‘समंदर’, श्रीमती सुमन, ओम, देवेन्द्र प्रसाद गोस्वामी, विनोद दीक्षित, संजय पण्डित, गौरी शंकर, अमित चतुर्वेदी, अंजू शर्मा, सुशीला चैधरी, उमाशंकर शर्मा, मोहन स्वरूप सक्सैना, राजीव शर्मा, कविता सक्सैना, जितेन्द्र राठोर, सीमा यादव, नितेश अग्रवाल, सतीश शर्मा, रवि बाबा, ब्रजलता आदि उपस्थित रहे । मंच संचालन आदर्श संस्कार शाला संयोजक दीपक गोस्वामी ने किया ।

 

नारद संवाद

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