देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreआजीवन धन-धन किया मिला नहीं संतोष हुआ निधन ही अंततः बोलो किसका दोष.....यही हाल होना है सभी का इंद्र की गद्दी क्या मिली सब की बुद्धि भ्रष्ट हो गई....इस गद्दी का दुरुप्रयोग जिस जिस इंद्र ने किया है नरक में भी जगह नहीं मिलती उसे...धनवान बनाए हो तो उन जीवों को देखो जहां आज भी एक वक्त का खाना मिलता है....जहां आज भी आंखे रास्ता देख रही है कि बस खाना मिलता रहे.....पर है इंद्रों तुम्हे तो अपनी गद्दी और ऐश्वर्य, धन इन सभी का लालच सभी को महंगा पड़ेगा....जीव का कल्याण करने के लिए तुम्हे इस धरा पे ये धनवान की व्यवस्था की है न की अपने मौज मस्तियों के लिए.... आगे हरिहर की इच्छा













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