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नालंदा को जब दुष्टों ने जलाया

आज खुशी का दिन अच्छी बात है होना भी चाहिए। हम चंद्रमा पे पहुंचे सफल हुए। पर आपको पता है हमारे वैदिक धर्मों के अनुसार चंद्रमा हमारा ही एक पार्ट है। हमारे सप्त ऋषियों ने ब्रह्मांड की सारी बातों को अपने अपने ग्रंथों में बता के गए है। तमाम बातें उस चंद्रमा के पीछे काले अंधेरे की भी की है। अगस्त्य संहिता में अगस्त्य ऋषि ने वरण किया है। हमारी धरोहर आज की नहीं कल्प से भी पहले की है। युगों के निर्माण तो बाद में हुए। पर हमने गुरुकल छोड़कर नही सभ्यता को पकड़ा जिसमें सिर्फ अच्छी नौकरी तो मिली पर ज्ञान नही। नालंदा को जब दुष्टों ने जलाया तो उसके साथ हमारी एक पूरी व्यवस्था जली। में सिर्फ इतना ही कहूंगा साइंस हमारा ही एक पार्ट है। अपने वैदिक व्यस्थाओं को आगे लाइए चंद्रमा क्या सूर्य नारायण भी आपके नजदीक हूंगे।
अपने धर्म में आज भी कुंडलिनी के जाग्रत ऋषि कही से कही पहुंचते है। पर अभी किसी कहो तो पाखंड बोलेंगे। वैसे खुशी ये है की वो उन पाखंडियों के सामने खुद नही आते। अपनी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे है। जो उस ईश्वर ने निधारित की है। शक्तियों के साथ दिखावा या खिलवाड़ नहीं करते। खेर खुशी मनाओ पर उसके साथ अपने वेदों के साथ उनका भी स्मरण करो ताकि आने वाली पीढ़ी ये जान सके हमारे उस समय के वानर रूपी हनुमान जी पृथ्वी से सूर्य देव का सफर उनको खाने के लिए कितनी देर में किया। बड़ी शक्ति है हमारे ग्रंथों में समझिए पढ़िए और जिंदगी के नए पहलुओं पे काम कीजिए।

नारद संवाद

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