देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreआज का विचार : खुद पे गुजरती है तो पता लगता है जीवन का सत्य क्या है...वरना करोड़ों है इधर किस को क्या खबर की कोई क्या सोच रहा है....सत्य को बार बार देनी पड़ती है परीक्षा....इसलिए झोठों का बोल बाला है.....कभी नहीं मिली उसे खुशी जिस सत्य का चोला पहना है.....कलयुग भी रहता उन पे प्रसन्न जो करते है बुराइयों आचरण सत्य वाला तो जीवन के पल पल गिन रहा है....जब तक है इस धरा पे कर्म का पूरा भाग भोग कर जायेंगे लौटना न पड़े इस नर्क लोक में इसलिए हरिहर का नाम लेते रहेंगे...आगे हरिहर की इच्छा













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