देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकल किसी ने कहां आपको नींद नहीं आती तो में प्रसन्नता के साथ बोला मेरे प्यारे भाई अब तो इकट्ठा सोऊंगा वो खामोश हो गए...नींद यहां की है इस नींद में क्या आंनद उस परम आनंद की नींद में आनंद है...जिसका इंतजार हमेशा रहता है...वैसे भी इस धरा पे क्या हम सोने या खाने या रिश्ते निभाने आए है..नहीं अपने भोग को भोगने और मोक्ष के लिए पर क्या करें सब माया में फंसे हुए जीव है अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करें ताकि यहां आने का हम सब का जीवन सफल हो सके....वैसे एक बात सही ये जीवन की यात्रा में बड़े बड़े विचित्र घटना क्रम होते है...पर हर घटना क्रम हमें सिखाता है की आप इस भोग भूमि पर सत्य कर्म करने आए न की अधर्म करने पर कलयुग अपने चक्र में फंसा के रखता है...इस से निकलना संभव भी और असंभव भी बस ये उस व्यक्ति के कर्म पे निर्भर करता है....हर मनुष्य की अपनी अपनी नियति है बस कर्म है... हमारे साथ जो लिखा है उसे तो होना ही होगा पर सत्कर्म करते रहो...पता नहीं जीवन की यात्रा किस पल रुक जाए...आगे हरि इच्छा













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