देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More
मथुरा(सतपाल सिंह)। ठा. श्रीप्रियाकान्तजू मंदिर पर कन्हैया के जन्मोत्सव को विषाल स्वरूप में मनाया जा रहा है । देष के विभिन्न स्थानों से हजारों श्रद्धालु इस समय प्रियाकान्तजू मंदिर पर आयोजित 108 श्रीमद्भागवत कथा एवं जन्माष्टमी महोत्सव में भाग लेने आ चुके हैं । 3 सितम्बर को भागवत कथा विश्राम के बाद मंदिर पर लाला के जन्म की तैयारियाँ शुरू हो जायगीं । भागवत प्रवक्ता देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के साथ हजारों श्रद्धालु रात्रि 9 बजे से तारणहार के प्राकट्योत्सव का आनंद मनायगें । कमलपुष्प मंदिर के बाहर आकर्षक रंगों के प्रकाष से जगमग की जायेगी तो गर्भगृह में देषी-विदेषी फूलों से ठाकुरजी के लिये फूल बंगला सजेगा ।
रेशम के धागों और डायमण्ड की बहुरंगी पौशाक ठाकुर जी को सजाया जाएगा। मंदिर सेवायत दिनेश शर्मा ने बताया कि जन्मोत्सव पर राधा-कृष्ण विग्रह के लिये सिल्क रेशम के धागों में डायमण्ड एवं अन्य रत्न जड़ित गुलाबी रंग मिश्रित बहुरंगी पौशाक तैयार की गयी है । वृन्दावन के कारीगरों ने जरी वर्क कर पौशाक को सजीला बनाया है । विश्व शांति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट सचिव विजय शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण विग्रह पर चॉंदी का छत्र चढ़ाया जायेगा । प्रियाकान्तजू को सोने का मुकुट पहनाकर सोने की बंशी धारण करायी जायेगी ।
गौघृत में तैयार होगा छप्पनभोग
ठाकुरजी के प्रसाद के लिये गौघृत में तैयार छप्पनभोग का नवैद्य तैयार किया जायेगा । रात्रि 9 बजे से 1 बजे तक मनेगा जन्माष्टमी महोत्सव और महाआरती होगी। 3 सितम्बर को रात्रि 9 बजे से प्रियाकान्तजू मंदिर के सामने कथा पाण्डाल में हजारों श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में भाग लेगें । विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भगवान के मधुर भजनों से भगवान को प्राकट्य के लिये मनाया जायेगा। ठीक 12 बजे मंदिर गर्भगृह में 51 विप्रवरों द्वारा मंगलष्लोको के मध्य कन्हैया का जन्म होगा । देवकीनंदन महाराज एवं विद्वान विप्रवर ठाकुरजी के लघु विग्रह का पंचामृत से महाभिषेक करेगें । इसके बाद सभी भक्तों द्वारा प्रियाकान्तजू की महाआरती की जायेगी । इसके बाद बधाई गीतों के साथ भक्त अपनी खुषी प्रकट करेगें । 4 सितम्बर को प्रातः 5.30 पर मंगलाआरती की जायेगी ।













Related Items
मकर संक्रांति पर राजस्थान रंग में रंगा : पतंगों से सजे मंदिर, तीर्थों पर डुबकी, जयपुर में पतंगबाजों की अग्निपरीक्षा
पूरी सृष्टि में केवल पुष्कर में है ब्रह्मा जी का मंदिर, जानिए कारण
जगन्नाथ पुरी मंदिर के चार द्वार, जिसमें छिपा है मोक्ष, विजय, समृद्धि और धर्म का रहस्य