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वेदांता को सुप्रीम कोर्ट से मिली तूतीकोरिन ऑक्सीजन प्लांट शुरू करने की मंजूरी, बढ़ेगी ऑक्सीजन की आपूर्ति

कोरोना महामारी के चलते देश के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की किल्लत हो रही है। इसे लेकर वेदांता ने तूतीकोरिन स्थित अपने स्टरलाइट कॉपर यूनिट को खोलने की मंजूरी मांगी थी ताकि वहां ऑक्सीजन बनाकर अस्पतालों को दी जा सके। आज इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता को तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित प्लांट में ऑक्सीजन बनाने की मंजूरी दे दी है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में न्यायालय की पीठ ने तमिलनाडु सरकार के फैसले के बाद यह आदेश दिया। तमिलनाडु सरकार ने कल सर्वदलीय बैठक के बाद संयंत्र को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी थी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि स्टरलाइट में सिर्फ ऑक्सीजन प्लांट को ही शुरू करने की मंजूरी मिलेगी। कोर्ट ने यह फैसला देश में ऑक्सीजन की बढ़ती मांग के चलते लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वेदांता जो भी ऑक्सीजन बनाएगा, उसे लेकर कोई भी राजनीतिक कहा-सुनी नहीं होनी चाहिए। 
 
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से किया था निवेदन 

केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से वेदांता को स्टरलाइट संयंत्र में ऑक्सीजन उत्पादन शुरू करने की अनुमति देने का निवेदन किया था। इस संयंत्र को वर्ष 2018 में हुई गोलीबारी की घटना में 18 लोगों की मौत के बाद बंद कर दिया गया था। दरअसल, प्लांट में प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं को लेकर 2018 में काफी प्रदर्शन हुए थे। 

कुछ शर्तों के साथ मिली है अनुमति 

सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता को ऑक्सीजन बनाने के लिए प्लांट शुरू करने की मंजूरी दी है, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह कंपनी के पक्ष में कोई इक्विटी नहीं तैयार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी वेदांता कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट को ऑपरेट नहीं कर सकता है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को तूतीकोरिन में वेदांता के ऑक्सीजन प्लांट में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक पैनल बनाने का भी निर्देश दिया है। इस पैनल में तूतीकोरिन के एसपी और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर शामिल होंगे। 

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी 

कोरोना मरीजों के इलाज में ऑक्सीजन की कमी को लेकर 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार पर सख्त होकर कहा कि लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं तो ऐसे में तमिलनाडु सरकार तूतीकोरिन में स्थित वेदांता के स्टरलाइट कॉपर यूनिट का अधिग्रहण कर वहां ऑक्सीजन क्यों नहीं बना रही है। चीफ जस्टिस एस.ए. बोबडे के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि इस प्लांट को वेदांता चलाए या कोई और, इससे कोर्ट को कोई मतलब नहीं है, उसे सिर्फ इस बात से मतलब है कि ऑक्सीजन का उत्पादन होना चाहिए। जस्टिस एल.एन. राव और जस्टिस एस.आर. भाट ने कहा था कि इस मामले में किसी को ठोस जवाब देना होगा क्योंकि लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं।

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