देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। जनसहयोग समूह की जल से जीवन विषय पर वेबनार में वक्ताओं ने भू गर्भीय जल के अत्यअधिक दोहन पर गहरी चिंता जाहिर की। वक्ताओं ने बताया कि किस तरह एक दिन भू गर्भीय जल खत्म हो जाएगा। इससे बचने के लिए उपाय भी सुझाये।
भूगर्भ जल का दोहन न रूका तो वह दिन दूर नहीं, जब इंसान प्यासा रह जाएगा। जल के बगैर जीवन संभव नहीं है। इसे ध्यान में रख कर हमें पानी के प्रति जागरूक रहकर जमीन के नीचे के पानी को बचाना होगा। केंद्र सरकार के प्रयास इस दिशा में शुरू हो गए हैं। उन्हें ठोस तरीके से लागू करने के लिए जन सहयोग की जरूरत है।
ये विचार भूगर्भ जल संकट पर जन सहायता समूह द्वारा आयोजित वेबिनार में जल शक्ति मंत्रालय (भारत सरकार) के विशेषज्ञ अजय कुमार सिंह ने व्यक्त किए। उन्होंने वेबीनार में उपस्थित समस्त जागरूक लोगों को आगाह किया कि पानी का संकट आने वाले वक्त में और बढ़ सकता है। हमने पानी बर्बाद होने से न रोका तो देश की 40 फीसदी आबादी प्यासी रह जाएग।
चेन्नई एवं अन्य शहरों में पानी जमीन में से खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि पानी संकट दूर करने के लिए भारत सरकार प्रयासरत है। हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय का गठन हुआ है, जिसमें पानी से जुड़े तमाम विभाग शामिल किए गए हैं। मोदी सरकार ने जो प्रोजेक्ट तैयार किया है उसमें हर घर में 2025 तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार के साथ हर व्यक्ति को पानी के बचाने की दिशा में काम करना होगा। हमें सरकार का साथ देना होगा। खुद जागरूक होना होगा।
इस मौके पर मुख्य वक्ता उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विवि प्रयागराज से संबद्ध डी पी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट चैमुहां के असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने कहाकि हम लोग अत्यअधिक पानी का दोहन कर आने वाली पीढ़ी को प्यासा मरने के लिए छोड़ नहीं सकते। इसके लिए हमें जागरूकता के साथ काम करना होगा। भूगर्भ जल को सिर्फ प्यास बुझाने के लिए उपयोग में लाना होगा।
जबकि नदी व वर्षा के पानी को हमें अन्य कामों में प्रयोग लाना होगा। इजराइल चीन समेत तमाम देशों में भूगर्भ जल को सिर्फ पीने के लिए उपयोग में लाया जाता है। जो फसलें सर्वाधिक पानी पी रही हैं उन पर अंकुश लगाए जाने की तत्काल जरूरत है।उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में जो भूगर्भ जल अधिनियम तैयार किया है, उसमें अब कार्यवाही होनी चाहिए।
इस मौके पर वेबिनार के कन्वीनर जनसहयोग समूह के समन्वयक अजय कुमार अग्रवाल ने प्रारंभ में सभी का परिचय तथा जन सहयोग समूह के रचनात्मक कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इस तरह के रचनात्मक कार्य वेबीनार के माध्यम से जागरूकता के लिए शुरू किए हैं। जन सहयोग समूह ने पहले भी पेयजल संकट व यमुना प्रदूषण पर संगोष्ठी आयोजित कराई हैं।
वेबीनार में समाजसेवी एवं व्यापारी नेता विजय बंटा सर्राफ ने कविता के माध्यम से पेयजल संकट एवं भूगर्भ जल बचाने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने कुछ उपाय भी सुझाए जिससे पानी की बर्बादी रोकी जा सके।
मथुरा के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर अनिल चैहान ने प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों पर प्रकाश डाला। अधिवक्ता श्री नीरज राठौर ने जल संचयन एवं हार्वेस्ट सिस्टम को प्रभावी तरीके से लागू करने पर बल दिया।
इस मौके पर डी पी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के प्राचार्य नवीन कुमार ने कहा कि युवा व छात्रों को पानी बचाने के लिए जागरूकता के काम पर जुटाया जाएगा। साथ ही पत्रकारिता विभाग के माध्यम से भी जागरूकता संगोष्ठी आदि आज कराई जाएंगी।













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