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लद्दाख के जनजातीय समुदाय को भी अब मिलेगा ‘वन धन योजना’ का लाभ

वन धन योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा के लिए ट्राइफेड द्वारा आयोजित किए जा रहे राज्य स्तरीय वेबिनार की श्रृंखला में, राज्य टीमों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के वन धन विकास केन्द्रों (वीडीवीके) के साथ एक महत्वपूर्ण आउटरीच सत्र आयोजित किया गया। सत्र का मुख्य विषय स्वीकृत वीडीवीके एवं वीडीवीकेसी के संचालन की योजना बनाना था। उपस्थित लोगों को (एसआईए, एसएनए, वीडीवीकेसी) केंद्र शासित प्रदेश में वर्तमान में स्वीकृत 10 वीडीवीके क्लस्टर को तत्काल प्रभाव के साथ संचालित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) लद्दाख के लिए क्रियान्वयन एजेंसी की भूमिका निभा रही है।

आदिवासियों के आय सृजन में होगी मदद

वेबिनार की शुरुआत एमएफपी योजना, वन धन योजना और अन्य अभिसरण परियोजनाओं के लिए एमएसपी के क्रियान्वयन की आवश्यकता और महत्व को दोहराने के साथ की गई थी, जो ऐसे मुश्किल समय में आदिवासियों के लिए रोजगार और आय सृजन में सहायता कर सकते हैं। यह बताया गया कि वन धन विकास केंद्रों और वीडीवीकेसी के क्रियान्वयन में कोई प्रगति नहीं हुई क्योंकि राज्य क्रियान्वयन एजेंसियों के पास जनशक्ति की कमी है। तथापि, 5 वीडीवीकेसी का सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही नियमित अंतराल पर अनुवर्ती बैठकें करने पर सहमति बनी।

प्रत्येक वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर के लिए पांच-चरणीय योजना लागू करने पर सहमति बनी

प्रत्येक वीडीवीकेसी के लिए पांच-चरणीय योजना तैयार करने और लागू करने पर भी सहमति बनी। यह पंच-चरणीय योजना के चरण हैं
चरण 1: प्रत्येक वीडीवीकेसी में एमएफपीएस की खरीद के लिए मदों की पहचान और खरीद, शेड और गोदामों सहित बुनियादी ढांचे के नियोजित विकास के साथ इसे मजबूत करना है।
चरण 2: इसमें जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक क्लस्टर के लिए स्थानीय एनजीओ या एनआरएलएम अधिकारियों की सलाहकार के रूप में नियुक्ति और प्रत्येक क्लस्टर खाते में 10 लाख रुपये स्थानांतरित करके प्रत्येक क्लस्टर को धन जारी करना शामिल है।
चरण 3: प्रत्येक वीडीवीके क्लस्टर और वीडीवीके की पहचान के लिए बैंक खाता खोलने एवं साइनेज और बोर्डों की स्थापना सहित मूल्यवर्धन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए प्रत्येक क्लस्टर के लिए एक व्यवसाय योजना तैयार करना।
चरण 4: व्यवसाय योजना के अनुसार अपने चयनित उत्पादों के उत्पादन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बिक्री में प्रत्येक क्लस्टर की योजना और सुविधा
चरण 5: इस चरण में, ईएसडीपी, स्फूर्ति और ट्राईफूड योजनाओं के दायरे का विस्तार करने के लिए धीरे-धीरे संबंधित समूहों के साथ जोड़ा जाएगा।

क्या है वन धन योजना

वन धन विकास योजना को प्रधानमंत्री द्वारा 14 अप्रैल 2018 को संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्‍मदिवस के मौके पर शुरू किया गया है। भारत सरकार ने जनजातीय समुदाय के लोगों को लाभान्वित करने के लिये इस योजना की शुरुआत की है। वन धन मिशन, गैर लकड़ी के वन उत्पाद का उपयोग करके जनजातियों के लिए आजीविका के साधन उत्पन्न करने की पहल है। जंगलों से प्राप्त होने वाली संपदा, जो कि वन धन है, का कुल मूल्य दो लाख करोड़ प्रतिवर्ष है। इस पहल से जनजातीय समुदाय के सामूहिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहन मिला है। देश के वन क्षेत्रों के जनजातीय जिलों में दो वर्ष में लगभग 3,000 वन धन केंद्र स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव रखा गया है। शुरू में 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी वाले 39 जिलों में प्राथमिकता के आधार पर यह पहल शुरू करने का प्रस्‍ताव रखा गया था। अब धीरे-धीरे देश के अन्य जनजातीय जिलों में इसका विस्तार किया जा रहा है।

क्या हैं वन धन विकास केंद्र

इन केन्द्रों की स्थापना का मुख्य लक्ष्य कौशल में बढ़ावा तथा क्षमता निर्माण प्रशिक्षण प्रदान करना है। इसके अलावा शुरुआती प्रोसेसिंग एवं मूल्य संवर्द्धन सुविधा केंद्र के रूप में वन धन केंद्रों की स्थापना करना है। आरंभ में इस केंद्र में टामारिंड ईंट निर्माण, महुआ फूल भंडारण केंद्र तथा चिरौंजी को साफ करने एवं पैकेजिंग के लिए प्रोसेसिंग सुविधा रखी गई। आरंभ में वन धन विकास केंद्र की स्थापना एक पंचायत भवन में की गई थी, जिससे कि प्राथमिक प्रक्रिया की शुरुआत एसएचजी द्वारा की जा सके। इसके अपने भवन के पूर्ण होने के बाद केंद्र उसमें स्थानांतरित किया गया है।

वन धन विकास केंद्र एमएफपी के संग्रह में शामिल जनजातियों के आर्थिक विकास में मील का पत्थर सिद्ध हो रहे हैं, जो उन्हें प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने और एमएफपी समृद्ध जिलों में टिकाऊ एमएफपी आधारित आजीविका अपनाने में सहायता कर रहे हैं।

योजना का उद्देश्‍य

Prasar Bharati News Service - PBNS
इस पहल का उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर गौण वनोत्‍पाद (एमएफपी) में मूल्य वृद्धि कर जमीनी स्‍तर पर जनजातीय समुदाय को व्‍यवस्थित करना है। इस योजना के तहत जनजातीय समुदाय के वनोत्‍पाद एकत्रित करने वालों और कारीगरों के आजीविका आधारित विकास को बढ़ावा देने पर बल दिया जा रहा है। इस पहल के जरिए गैर लकड़ी वन उत्पादों की मूल्य श्रृंखला में जनजातीय लोगों की भागीदारी वर्तमान 20% से बढ़ाकर लगभग 60% तक ले जाना है। आपको बता दें, एमएफपी या गैर लकड़ी वनोत्पाद (एनटीएफपी) देश के लगभग 5 करोड़ जनजातीय लोगों की आय और आजीविका का प्राथमिक स्रोत है।

योजना का क्रियान्वयन

योजना के अनुसार, ट्राइफेड(ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) गौण वनोत्‍पाद (एमएफपी) आधारित बहुउद्देशीय वन धन विकास केंद्र स्‍थापित करने में मदद करता है। यह विकास केंद्र 10 स्‍वयं सेवी समूहों (एसएचजी) का केंद्र होता है, जिसमें जनजातीय क्षेत्रों में 30 एमएफपी एकत्रित करने वाले जनजातीय व्यक्ति शामिल होते हैं। एसएचजी के प्रतिनिधियों से गठित प्रबंधन समिति स्‍थानीय स्‍तर पर केंद्रों का प्रबंधन करती है। यह योजना केन्द्रीय स्‍तर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर महत्त्वपूर्ण एजेंसी के रूप में ट्राइफेड के माध्‍यम से लागू की जा रही है। योजना के क्रियान्वयन में राज्‍य स्‍तर पर एमएफपी के लिये राज्‍य नोडल एजेंसी और जमीनी स्तर पर जिला कलेक्टर महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।

नारद संवाद

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