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इस धरा पे वो दोबारा नहीं आयेंगे

अपनी पुरानी पीढ़ी से सीखे और उनका ध्यान रखे इस धरा पे वो दोबारा नहीं आयेंगे : एक सफलता के पीछे बहुतों का साथ होता है हर उपलब्धि में हमेशा बड़ों का आशीर्वाद होता है...इसलिए अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते रहें क्योंकि इस धरा पे आने वाले समय में वो आखिरी पीढ़ी  साबित होंगे क्योंकि ये संस्कार आने वाले इस युग में फिर नहीं मिलेगा....लोग तरसे ...आने वाले पीढ़ी की प्रवृति अलग हो जाएगी जितना हो सके अपने बुजुर्गों का सम्मान करें.....मुझे महाभारत का एक वाक्या याद आया जब महर्षि वेदव्यास हस्तिनापुर आए तो उन्होंने धृतराष्ट्र को बहुत समझाया कि ऐसे महान योद्धा फिर किसी युग में जन्म नहीं लेंगे जिस युग स्वयं नारायण अवतार लेके श्रीकृष्ण के रूप में आए है इसलिए रोक दो इस संग्राम को क्योंकि फिर तुम्हे युगों तक माफ नही किया जाएगा...पर धृतराष्ट्र मोह की ऐसी पट्टी बंधी थी की सब जान के भी वो मौन हो गए....ये सच है ऐसे महान योद्धा न थे न आयेंगे जहां भगवान परशुराम को अपने शिष्य गंगा पुत्र देवव्रत या कहे भीष्म से हार का समाना करना पड़ा जिसे तब भगवान परशुराम ने कहा ऐसा शिष्य न इस पृथ्वी पर आया है न आएगा...इसलिए मेने आप लोगों ये कहा है की २०२० से कलयुग अपने रूप में आ गया है...उसकी गति में परिवर्तन हुआ है...आप लोग अपने आस पास भी देख सकते है उसके रूप को.... कि सब बदल रहा है....खेर मुझे जो कहना था अपने उस संस्कारी वाली पीढ़ी का ध्यान रखें और उनसे उनके अनुभव और बातें करें ताकि आप कुछ इन आने वाली पीढ़ी को दे जाए....पर वो ज्यादा आप से सीखेंगे न समझेंगे क्योंकि उन सभी पर कलयुग की विशेष कृपा रहेगी और जितना पुण्य होगा उसी के अंदर पाप का भंडारा होगा इसलिए धर्म अपने चरम पे होगा और अधर्म का रास्ता भी उसी के अंदर होगा..…आगे हरि इच्छा जो होगा उस सिर्फ हरि ही जाने.....गौतम

 

नारद संवाद

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