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वृंदावन में चल रही अखाड़ों में नागा साधु बनाने की परंपरा

मथुरा। वृंदावन कुंभ में नागाओं की भर्ती का सिलसिला शुरु हो गया है। सैकड़ों साल पहले धर्म की रक्षा के लिए बनाए गए अखाड़ों में नागा साधु बनाने की परंपरा का निर्वाह श्रीपंच मालाधारी अखाड़े में महंत एवं संतों के बीच हुआ। भगवान को साक्षी मानकर महंतों के समक्ष बने नाग साधुओं को युद्ध कौशल का प्रशिक्षण खिलाड़ी गुरु द्वारा दिया गया। इस अखाड़ा परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में वैष्णव जन जमा हुए। रीपंच मालाधारी अखाड़ा में अखाड़ा की दीक्षा लेने वाले नो साधुओं को उनके अतीत गुरु का नाम के साथा उनका नाम जोड़ा गया। इसके बाद पुष्प मालाओं से उनका स्वागत किया। इसके पश्चात अखाड़ा के श्रीमहंत द्वारा अखाड़े की पंरपराओ की पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वाह करने और अखाड़ों की रक्षा करने की शपथ दिलाई गई। इसके बाद बैंडबाजों की धुनों के साथ वह अखाड़े में विराजित आचार्य बालानन्दाचार्य महाराज की चरणपादुकाओं का पूजन किया। इस बीच खिलाड़ी गुरु ने उन्हें शस्त्र विद्या का भी प्रशिक्षण दिया। सिंहपौर हनुमान मंदिर के महंत सुन्दर दास महाराज ने बताया कि वैष्णव साधुओं की रक्षा करने वाले नागा साधु होते हैं। यह नागा भर्ती वृंदावन कुम्भ पूर्व बैठक के अलाव हरिद्वार और उज्जैन कुंभ में की जाती है। नागाभर्ती की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। उसी परंपरा का निर्वाह कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक में किया जा रहा है।
इस अवसर पर झाड़िया अखाड़े के श्रीमहंत सुन्दरदास महाराज, जमनादास, नागा अतीत महंत एवं कुंजबिहारी शास्त्री मौजूद थे।

 

नारद संवाद

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