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Read Moreनई दिल्ली। देशभर में कोरोना का कहर लगातार बढता जा रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज कोरोना की जांच को लेकर निजी लैब द्वारा लिए जा रहे मनमानी राशि वसूलने को केन्द्र सरकार से कहा है कि निजी लैब को कोरोना जांच के लिए पैसे लेने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। हम इस मामले पर आदेश पारित करेंगे।
जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा निजी लैब को कोविड-19 के परीक्षण के लिए चार्ज करने की अनुमति नहीं देते हैं। सरकार को इसकी जांच मुफ्त में करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल जनरल तुषार मेहता को सुझाव देते हुए कहा कि निजी लैब को जांच के लिए ज्यादा शुल्क नहीं दें। कोई ऐसा तंत्र विकसित करें जिसके तहत निजी लैब के टेस्ट राशि को सरकार वापस कर सके। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में उचित कदम उठाएंगे। सरकार अपनी तरफ से हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि 118 प्रयोगशालाओं में रोजाना 15 हजार टेस्ट हो रहे थे। इन 47 निजी प्रयोगशालाओं को जोड़ा गया। पता नहीं कितनी और चाहिए होंगी। पता नहीं है कि लॉकडाउन कब तक चलेगा।आपको बताते जाए कि 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें सरकारी और निजी लैब में कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच निशुल्क कराने का दिशानिर्देश क्रेंद्र सरकार को देने की मांग की थी।
साभार-khaskhabar.com












