देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। मथुरा महानगर विकास समिति, जन सहयोग समूह, भारतीय किसान यूनियन, आमआदमी पार्टी जैसे राजनीतिक और गैर राजनीतिक संगठनों की ओर से लाॅकडाउन के दौरान की स्कूल फीस मांफी की मांग को लेकर चलाई गई मुहिम कारगर साबित हो रही है। लगातार मिल रहे सुझावों को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक कर फीस मांफी के मुद्दे पर निर्णय लेने की बात कही है। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्रा ने कहाकि जिले में बच्चों की फीस को लेकर जो मांगे या सुझाव आ रहे हैं इस विषय को लेकर जिले के सभी स्कूल एवं कालेजों के प्रमुखों की एक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें जो भी राय होगी और शासन के निर्देशों के अनुकूल कार्यवाही की जाएगी।
बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में सामाजिक संस्थाओं ने कहाकि स्कूल कालेजों की तरफ से कोरोना संक्रमण के संकट के दौरान अवकाश के दिनों की भी फीस मांगी जा रही है। चिंता की बात यह है कि स्कूल कालेज वाले कहते हैं ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है, इसमें गरीब तबके का छात्र प्रभावित हो रहा है। उस पर अच्छा मोबाइल न होने के कारण उसकी पढ़ाई नहीं हो पा रही और फीस भी देनी पड रही है।
फीस मांफी को लेकर लगातार अभियान चला रही मथुरा विकास समिति के मीडिया प्रभारी पवन चतुर्वेदी ने कहाकि कई दूसरे जनपदों मंे उचित निर्यण लिये गये हैं। उचित फैसला लिया जाना ही महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि उचित फैसला सही समय पर लिया जाये जिससे उसकी प्रासंगिकता बनी रहे। विद्यालय प्रबंधन लगातार अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं। अभिभावक मानसिकरूप से परेशान हैं। इस लिए जिला प्रशासन को जल्द से जल्द नतीजे पर पहुंचना चाहिए। जन सहयोग समूह के संयोजन अजय कुमार अग्रवाल का कहना है कि मध्य वर्ग कोरोना सरकार की सहायता के प्रयासों में सामिल नहीं रहता है जबकि इस तरह की आपदाओं में सबसे ज्यादा मध्यवर्ग ही प्रभावित होता है। जिला प्रशासन जल्द और उचित निर्णय ले जिससे अभिभावकों राहत मिल सके।













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