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यमुना की धारा को लगातार धकेलने का दिखने लगा असर

मथुरा। विश्राम घाट सहित दूसरे मथुरा के प्राचीन घाटों को यमुना की धारा छोड कर दूर जा रही है। यमुना की धार को सुनियोजित तरीके से धकेलने की निरंतर चल रही प्रक्रिया का असर अब दिखने लगा है।

गोकुल बैराज के फाटक बंद होने और मध्य जुलाई का समय होते हुए भी विश्राम घाट पर कीचड पसरा हुआ है। आसपास के दूसरे घाटों की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है। विश्राम घाट सहित दूसरे घाटों से नगर निगम ने कीचड हटाने का प्रयास किया था लेकिन इसके बाद कीचड फिर जमा हो गई। यमुना का जल स्तर इस समय जितना है उतने ही जल स्तर पर इससे पहले यमुना की धारा विश्राम घाट को छू कर चलती थी। प्रदूषण के बावजूद तमाम धार्मिक अनुष्ठान और स्नान भी श्रद्धालु कर पाते थे।

बिना किसी सर्वे और अनुमति के लगातार यमुना की स्ट्रीम से छेडछाड की जा रही है। स्थित यह है कि कई जगह 200 से 300 मीटर तक यमुना की धार को पीछे धकेल दिया गया है। पक्के निर्माण किए जा रहे हैं। पार्क बनाए जा रहे हैं। प्लाटिंग की जा रही है। मकान बना कर एलॉट किए जा रहे हैं। अभी तक यमुना खादर में निर्माण का मुद्दा उठता था अब यमुना की धारा पर कब्जा कर निर्माण का मुद्दा उठ रहा है।


  मथुरावासी इस पूरे घटनाक्रम को देख कर भी अनदेखा कर रहे हैं। यहां तक कि जिन लोगों की रोजीरोट इन घाटों से चल रही है उन्होंने भी मौन साध लिया है। चार से पांच साल पहले तक कई दर्जन एक संगठन थे जो यमुना मुक्तीकरण और शुद्धिकरण के लिए लगातार आवाज उठा रहे थे। ये संगठन भी यकायक लगभग भूमिगत हो गए हैं और यमुना के लिए कहीं कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही है। अपनी गर्दन बचाने के लिए सरकारी विभाग भी खेल खेल रहे हैं। किसी भी तरह की लापरवाही के आरोप से बच कर विभाग नोटिस जारी कर रहे हैं, लेकिन उन नोटिस पर कार्रवाही आगे नहीं बढा रहे हैं।

यह स्थिति नगर निगम से लेकर विद्युत विभाग तक की है। यमुना की धारा को धकेल कर तैयार किए गए करीब 8 से 10 किलोमीटर लम्बे और 200 से 300 मीटर चौडे प्लेट फार्म पर पानी की व्यवस्था करने के लिए अवैधरूप से अंडर ग्राउण्ड केबिल डाल कर वर्षों से बिजली की चोरी की जा रही है।

दर्जन भर से ज्यादा बिजली के ट्यूबवैल और सम्बर्सेविल इन बिजली चोरी कर चलाई जा रही हैं। विद्युत विभाग की ओर से हाल ही में एक नोटिस जारी किया गया था। जिसमें एक एनजीओ के ऑनर के खिलाफ विद्युत चोरी सहित दूसरी कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने की संस्तुति की गई थी लेकिन यह कार्रवाही सिर्फ नोटिस जारी करने तक सीमित रह गई।

अवैध पक्के निर्माण को लेकर भी इसी एनजीओ के ऑनर को नगर निगम ने भी एक नोटिस हाल ही मंे जारी किया है। नगर निगम भी सिर्फ नोटिस को अपनी फाइलों में लगा कर फुर्सत में आ गई है। इसी तरह के नोटिस दूसरे विभाग भी जारी कर रहे हैं और यह जानते हुए जांच हुई तो उनकी गर्दन फंसेगी, फंदे से निकलने के रास्ते तलाश रहे हैं लेकिन कार्रवाही की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है।

नारद संवाद

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