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किसानों के कूंच को गांव में रोकने की रणनीति पर काम रहा जिला प्रशासन

मथुरा। किसान आंदोलन के चलते पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है। गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के किसानों को सम्हालने में पसीने छूटते रहे। सोमवार को अनुमान से कहीं अधिक किसान सडकों पर उतर आये। जनपद से गुजर रहे एक्सप्रेसवे और हाईवे पर सुरक्षाबलों का कड़ा पहरा है। पुलिस के साथ पीएसी को तैनात किया गया है। किसानों को पुलिस ने जगह जगह दिन भर रोके रखा, दूसरी ओर किसान देर रात तक दिल्ली कूंच की जिद पर अडे हुए थे। यमुना एक्सप्रेस वे के जावरा टोल पर सुरक्षाबलों का जमावडा रहा। रविवार को जावरा टोल पर एडीजी अजय आनंद और आईजी ए.सतीश गणेश भी पहुंचे थे। उन्होंने सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया था। इस दौरान जिलाधिकारी नवनीत चहल, एसएसपी डा.गौरव ग्रोवर, एसपी देहात श्रीशचंद्र, एडीएम, एसडीएम, सीओ आदि भी रहे। आलाधिकारियों ने अधीनस्थानों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये थे।
सोमवार को अल सुबह ही जिलाधिकारी नवनीत चहल एवं एसएसपी डा.गौरव ग्रोवर यमुना एक्सप्रेस वे पर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने के लिए पहुंच गये थे। सडक पर ही आधीनस्थ अधिकारियों के साथ इंतजामों की ब्रीफिंग भी की।


अलग अलग रास्तों से किसान संगठनों ने दिल्ली बार्डर तक पहुंचने की रणनीति तैयार की थी। भारतीय किसान यूनियन ’टिकैत’ के जिलाध्यक्ष राजकुमार तौमर के नेतृत्व मंे ट्रैक्टरों का एक जत्था बल्देव से दिल्ली आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर दिल्ली पहुंुचने की रणनीति के साथ निकला था। इस गुट को  पुलिस प्रशासन ने बल्देव मथुरा रोड पर यमुना एक्सप्रेस वे के नीचे रोक लिया। दूसरी और भारतीय किसान यूनियन ’भाून’ के नेत्त्व में किसानों जत्था ट्रैक्टरों साथ यमुना एक्सप्रेस वे के राया कट पर पहुंच, यहां पहले से भारी संख्या में तैनात पुलिसबल बल ने उन्हें एक्सप्रेस वे पर चढने से रोक दिया।


वहीं गोवर्धन बरसाना रोड स्थित गांव पलसों पर किसानांे को रोकने का जब पुलिस ने प्रयास किया तो  किसानों ने रोड जाम कर दिया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया। एसडीएम राहुल यादव, क्षेत्राधिकारी रविकांत पाराशर मौके पर पहुंच गये। किसान नेता मुकेश शर्मा के नेतृत्व में किसान धरने पर बैठे गये। सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। तहसील मांट में किसाना आंदोलन का असर दिखा। यमुना एक्सप्रेस वे की ओर कूंच कर रहे किसानों को पुलिस ने रोक लिया। क्षेत्र में बडी संख्या में गांवों से तिरंगा और यूनियन के झंडे लगे ट्रैक्टर यमुना एक्सप्रेस वे से होकर दिल्ली बार्डर पर जाने के लिए निकले थे। किसानों ने रणनीति तैयार की थी कि नींवगांव, चैकड़ा, नौहझील, बाजना और मांट क्षेत्र से करीब 500 ट्रैक्टर यमुना एक्सप्रेसवे से होते हुए परेड में शामिल होंगे। किसान संगठनों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने ट्रैक्टरों को कहीं भी रोकने का प्रयास किया तो वे वहीं बैठकर आंदोलन शुरू कर देंगे। इधर, मांट क्षेत्र से 200 ट्रैक्टरों के दिल्ली जाने की सूची तैयार की गई है।


हम किसी भी कीमत पर दिल्ली पहुचेंगे। जिला प्रशासन कितने भी पहरे बैठा ले। उन्होंने कहाकि हमने पुलिस की तीन बेरीकेडिंग यहां तक पहुंचने के लिए तोड दीं। महिला पुलिसकर्मियों को आगे कर हमारे कारवां को रोकने की चाल चली गई है। हम नई रणनीति तैयार कर रहे हैं जिससे दिल्ली पहुंच सकें।
राजकुमार तौमर, जिलाध्यक्ष भाकियू ’टिकैत’

 

 

 

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