देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। विजया एकादशी पर्व पर कुम्भ पूर्व वैष्णव बैठक का दूसरा शाही स्नान संपन्न हुआ। शाही को सकुशल संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक प्रबंध किये गये थे। यमुना के जल की शुद्धता को लेकर पहले शाही स्नान के बाद बहुत कुछ कहा गया था। इस का भी इस बार पूरा ध्यान रखा गया। दूसरे शाही स्नान पर कान्हा की नगरी का जर्रा जर्रा राधे राधे की जय-जयकार से गूंज उठा।
यमुनातट पर संत-महंतों के सान्निध्य में भक्तों ने श्रद्धा के सागर में गोते लगाए। वहीं मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड उमडीं। देवराह बाबा मार्ग से शुरू हुई शाही पेशवाई में सजे धजे ऊंट घोड़ों पर बैठे साधु, बग्घियों में विराजित महामण्डलेश्वर, पटेबाजी करते नागा-साधु न केवल सनातनी परम्परा के विराट वैभव का प्रदर्शन कर रहे थे। श्रद्धालुओं के लिए यह दृष्य आस्था और कौतुहल का विषय बना रहा। नगर भ्रमण करने के दौरान शाही पेशवाई का जगह-जगह भक्तों ने पुष्प वर्षा एवं आरती करके स्वागत किया।
धूमधाम से निकली शाही पेशवाई में श्रीमहंतों, संतों के अलावा करीब 250 महामण्डलेश्वर, हजारों वैष्णवजन भी शामिल हुए। मंगलवार प्रातरू शाही पेशवाई नगर भ्रमण के लिए धूमधाम के साथ शुरु हुई। इसमें सबसे आगे वीर ध्वजों को लेकर अखाड़ों के संत पूरे जोश के साथ चल रहे थे। उनके पीछे-पीछे तीन अनी के श्रीमहंत धर्मदास महाराज, महंत राजेन्द्र दास महाराज एवं महंत किशन दास महाराज ने चांदी के छत्र लगाकर सजी-धजी बग्घियों पर विराजित थे। इनके अलावा तीन अनि के 18 अखाड़ों के श्रीमहंत, महामण्डलेश्वर, खालसाओं के महंत एवं बड़ी संख्या में संत एवं वैष्णव जन चल रहे थे। कदम-कदम पर ब्रजवासियों के स्वागत की अनवरत श्रृंखला संत- महंतों को अभिभूत कर रही थी। सड़कें फूलों की बरसात से पट गईं। श्रद्धा से परिपूर्ण स्वागत अपने चरम पर था।













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