देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कान्हा की नगरी पर बेरह कोरोना का कहर जारी है। कोरोना मरीजों की संख्या और कोरोना से हो रहीं मौत तक सिमटे गणितीय आंकडों से कहीं ज्यादा भयावह वह कारोबारी सन्नाटा है जिसने आम आदमी से लेकर उद्योगपतियों तक को सन्न कर दिया है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार कान्हा की नगरी में सन्नाटा पसरा हुआ है। न सिर्फ श्रद्धालु नदारद हैं, आर्थिक गतिविधियां भी ठप पड़ी हैं। लोगों के चेहरों पर तनाव है। कोरोना ने धार्मिक पर्यटन से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार छीन लिया है। श्रद्धालुओं के न आने से होटल व्यवसायी मायूस हैं। कान्हा की पोशाक तैयार करने मंे जुटे रहने वाले कामगारों के हाथों को काम नहीं मिला। मूर्तिकार बेकार बैठे हैं।
आटो, टैक्सी, ई-रिक्शा चालक परेशान हैं। फूल की खेती केरने वाले किसान बर्बाद हैं। अपने आराध्य के आगमन की लोगों में खुशी तो है पर वह उल्लास कहीं खो सा गया है जो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर चारों ओर नजर आता था। चुनिंदा मंदिरों को छोड दिया जाये तो इस बार जन्माष्टमी पर समूचे ब्रज में रौनक नहीं है। इन मंदिरों पर भी सजावट तो है लेकिन इन मनोहारी दृश्यों को निहारने वाली आंखें नहीं है। हालांकि भगवान के जन्मोत्सव से ठीक एक दिन पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मथुरा आये और कोरोना की समीक्षा के बाद अफसरांे को निर्देश दिये कि मथुरा वृंदावन के तिराहे चैराहों पर सजावट की जाये। मंदिरों को भी सजाया जाये।
व्यापारी नेता अजय अग्रवाल कहते हैं, शायद 5200 वर्ष के इतिहास में यह पहला मौका ही होगा जब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इतना सन्नाटा पसरा है, हो सकता है इतिहास में कभी कुछ ऐसा हुआ हो लेकिन ज्ञात इतिहास में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। पहली बार हो रहा है जब देश विदेश से प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आने वाले लाखों श्रद्धालु मथुरा नहीं आ रहे हैं। प्रशासन ने मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
बुजुर्ग व्यापारी बताते हैं एक समय वह था जब कहा जाता था कि ’सावन की कमाई साल भर खाई’ यह कहावत जन्माष्टमी पर होने वाली व्यापारियों, मजदूरों, वाहन चालकों, होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस मालिकों इन में लगे कर्मचारियों को मिलने वाले व्यापार और कार्य को लेकर बनी थी। मूर्ति, पूजा के सामान का कारोबार हो अथवा रामनामी दुपट्टा, मुकुट, पोशाक, श्रंगार, धार्मिक तस्वीरे,ं कंठी माला, बच्चों के कुर्ता धोती इत्यादि बहुत सारी चीज हैं जिनकेे कारोबारी जन्माष्टमी का पर आने वाले श्रद्धालुओं का इंतजार प्रतिवर्ष करते हैं। प्रतिवर्ष 20 लाख से अधिक श्रद्धालु जन्माष्टमी पर मथुरा आते हैं। टेक्सी मालिक, ई रिक्शा, टेंपो चालक, टैक्सी चालक और विभिन्न प्रकार के निजी वाहन चालक जिनकी संख्या लगभग 5000 रहती है इनके द्वारा ब्रज के विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों में श्रद्धालुओं को भ्रमण कराने से मथुरा जिले के साथ ही बृज चैरासी कोस के अंदर श्रद्धालुओं से व्यापार प्राप्त होता है। मथुरा जिले में होटल, धर्मशाला, आश्रम, गेस्ट हाउस छोटे बड़े मिलाकर जिनकी संख्या लगभग 8 से 10 हजार बैठती है।
मथुरा वृन्दावन होटल ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री अमित जैन बताते हैं कि 12 से 15 करोड़ का व्यापार होटल धर्मशाला वालांे को जन्माष्टमी पर प्रितिवर्ष आने वाले श्रद्धालुओं से होता है। मूर्ति व्यवसायी आशीष बब्बू के अनुसार धातु की मूर्तियों का बड़ा कारोबार जन्माष्टमी पर रहता है जो इस बार नही हो पाया। लगभग मथुरा जिले के 3 हजार लोग इस कारोबार से जुड़े हुए है। पोशाक व्यवसायी मनोज कुमार ने बताया 800 व्यापारी ओर 5 हजार कर्मचारियों को मिलने वाला रोजगार छिन गया है। लोकडाउन से अब तक 15 से 20 प्रतिशत तक ही बिक्री का अनुमान है।
कुल मिलाकर एक अनुमान के अनुसार 200 से 225 करोड़ का कारोबार बृज चैरासी कोस में सावन भादों के महीने में हो ता रहा है क्योंकि श्री कृष्णजन्म अष्टमी पर आने वाले श्रद्धालु श्री राधा अष्टमी का उत्सव बरसाने में करने के बाद ही विदा लेते रहे है। अगर दूसरे रूप में देखा जाए तो स्टेशन पर कुलियों और स्टालों से लेकर बस स्टैंडों पर उमडने वाले श्रद्धालुओं के सैलाब से लगभग 5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है जो इस बार मायूस बैठे है।
श्रद्धालुआंे के लिए तरस गया ब्रज
कोरोना का कहर कान्हा की नगरी पर ऐसा टूटा है कि श्रद्धालुओं की श्रद्धा और हलचल से गुलजार रहने वाली गलियां सूनी सी हो गई हैं।
कान्हा के ग्वाला भी हैं मायूस, श्रद्धालुओं के न आने से दूध की खपत नहीं विगत वर्ष करीब पांच करोड़ श्रद्धालु मथुरा आये। इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि ब्रज में दूध का भरपूर उत्पादन होने के बाद भी दूध की किल्लत रहती है। यहां के प्रसाद में पेड़, माखन मिश्र, खानपान में लस्सी, रवाड़ी हैं, रक्षाबंधन के आसपास घेवर की मांग रहती है। ये सब दूध से बनते हैं, इसके अलावा गोवर्धन में श्रद्धालु दूध की धार से परिक्रमा करते हैं। दूध की इतनी बड़े स्तर पर खपत होने के चलते यहां पशुपालन लाभ का सौदा रहता है।
इस बार पशुपालकों को प्रति लीटर दूध पर 15 से 20 रूपये का नुकसान उठाना पड रहा है। अथवा यह कहें कि कई जगह तो दूध के दाम आधे रह गये हैं तो ज्यादा ठीक रहेगा। कहीं कहीं दूध के खरीदार भी नहीं हैं, डेरी उद्योग भी ठप पड़ गया है, दूध उठ नहीं रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध के लेनदार नहीं होने से पशुपालक संकट में आ गये हैं। कहंे तो कान्हा के ग्वाला कोरोना की जबर्दस्त मार सहन कर रहे हैं।
न फूल बंगले सजे न फूल बिके
फूल की खेती का कारोबार सीधा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से जुडा नहीं है। यहां मंदिरों में वर्ष भर फूल बंगला सजते हैं। गर्मी के सीजन में फूल बंगला मंदिरों में नियमित सजते हैं। हालांकि विशेष अवसरों पर वर्ष भर यह आयोजन होता है। इस बार लाॅकडाउन से पहले ही मंदिर बंद कर दिये गये जो अभी तक बंद हैं। इस बार करोडों रूपये का फूल खेतों में ही सड गया। फूल बंगला में विदेशी फूलों का भी उपयोग होता है। मंडी के आढतिया से लेकर ट्रांसपोर्टर तक को रोजगार मिलता है। इस कारोबार से जुडे हजारों लोग बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। इतना ही नहीं सैकडों कारीगरों को भी फूलबंगला काम देते हैं। यह विशेष कला है इस लिए फूल बंगला सजाने वाले कारीगरों को भी अच्छा पैसा मिल जाता है।
पिछले साल श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सिर्फ अगस्त महीने में आठ लाख श्रद्धालु आये थे। मथुरा वृंदावन में पिछले साल करीब पांच करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ था। इनमें से 3.5 से 4 करोड श्रद्धालु बाहर से आये थे। लाॅकडाउन लगने के बाद से मथुरा वृंदावन में सिर्फ 1200 श्रद्धालु आये हैं।
-डीके शर्मा, जिला पर्यटन अधिकारी
जन्मस्थान सहित प्रमुख मंदिरो में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी
ब्रज के अधिकांश बडे मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी हुई है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर तीन दिन श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित है। बाहर से आने वाले किसी भी श्रद्धालु को मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं मिल रहा है। 11 से 13 अगस्त तक बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की एंट्री पर रोक है। वहीं गोकुल के नंदकिला नंदभावन में 16 अगस्त तक प्रवेश पर पाबंदी है। मंदिर बाहर बकायदा इस बात की सूचना चस्पा की गई है। साथ ही पुलिस बल भी तैनात है, यह सुनिश्चत किया गया है कि मंदिरों की तरफ श्रद्धालुओं का रूख न हो सके। हालांकि मथुरा वृंदावन के प्रवेश मार्गांे पर भी पुलिस बल तैनात है। यमुना एक्सप्रेस वे और दिल्ली आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग के उन सभी प्रवेश मार्गों पर पुलिस बल तैनात है, जहां से बाहरी श्रद्धालु मथुरा वृंदावन में प्रवेश करते हैं। विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर वृंदावन, द्वारकाधीश मंदिर मथुरा, दानघाटी मंदिर गोवर्धन, इस्कान मंदिर, प्रेम मंदिर, प्रियाकांत जू मंदिर आदि नये पुराने सैकडों मंदिरों में भी प्रवेश वर्जित है।













Related Items
पुरानी कहावत और नया भारत
कृष्ण जन्माष्टमी 2025: 15 या 16 अगस्त? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और विशेष महत्व
देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्साह : जयपुर के गोविंद देव जी से लेकर हरिद्वार तक, मंदिरों में लगा भक्तों का तांता