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MATHURA : लीज पर खेती बाडी करने वाले छोटे किसानों को भी मिले मुआवजे का लाभ

मथुरा। पीढी दर पीढी खेती की जमीन विभाजित होती जा रही है। बडी संख्या में किसान परिवार सीमांत या भूमिहीन किसानों की श्रेणी में आ गये हैं। पुस्तैनी खेती बाडी करते आ रहे इन परिवारों का मोह खीती से छूट नहीं रहा है, कोई दूसरा रोजगार नहीं होने पर भी खेती बाडी करना इनकी मजबूरी है। प्राकृतिक आपदा आने पर खेती बाडी में नुकसान होने पर उन कमजोर परिवारों को मुआवजा नहीं मिलता जिनका परिवार पूरी तरह से खेती बाडी पर ही निर्भर है। जबकि उन परिवारों को मुआवजे का लाभ मिल जाता है जिनके नाम पर खेत तो है लेकिन वह खेती नहीं करते हैं। मुआवजा उन लोगों के खाते में चला जाता है जो नौकरी कर रहे हैं, कईं धंधा कर रहे हैं और खेत को पट्टे पर उठा जाते हैं। आपदा आती है और फसल नष्ट हो जाती है तो नुकसान उस किसान का होता है जो खेत जोत रहा है और मुआवजा उस व्यक्ति को मिलता है जो खेत होने पर भी खेती नहीं करता है।
  सासंद हेमा मालिनी अपने लोकसभा क्षेत्र के ऐसे किसानों की पीडा को समाझा और इसके समाधान के लिए कानून बनाने की मांग संसद में की। सांसद हेमा मालिनी ने संसद में कहाकि छोटे किसान बडे किसानों से पट्टे में खेती लेते हैं, पूरे साल मेहनत कर खेती करते हैं। मुआवजा उन गरीब किसानों को नहीं मिल पाता है, मुझे लगा कि जैसे मकान का मालिक किरायेदार के साथ एग्रीमेंट करता है, ऐसे ही अगर छोटे किसान का बडे किसान के साथ एग्रीमेंट हो जाए तो इस योजना का लाभ मिल सकते हैं। इससे हमारे किसान बहुत ही खुष हो सकते हैं। उन्होंने कहाकि फसल नष्ट होती है तुरंत सरकार किसानों को मुआव दे देती है। हाल ही में ओलवृष्टि हुई, फसल नष्ट हुई केन्द्र सरकार और राज्य सरकार तुरंत उनके बैंक खाते में राशि जमा कर देती है। मथुरा के किसान उदाश थे और बोले कि उन्हें तो मुआवजा नहीं मिला। अपने पूरे परविार के साथ मेहनत कर खेती में काम करते हैं। मुआवजा फसल नष्ट होने पर उस गरीब किसान को नहीं मिल पाता है। इसी तरह अगर बडे किसान छोटे किसान के साथ एक एग्रीमेंट का प्रबंध हो जाए तो छोटे किसान को इस का लाभ मिल सकता है। दीन दयाल उपाध्या का सपना पूरा हो सकता है, हमारे किसान खुष हो सकते हैं।
प्राकृतिक आपदा तो समय समय पर आती रहती हैं। मथुरा में यह पता चला कि वहां के किसान बहुत ही उदाश थे बोलने लगे कि हमें तो मुआवजा नहीं मिलता है। साल भर वह पट्टे पर खेती लेकर साल भर मेहनत कर खेती में काम करते हैं। लाभ उन गरीब किसानों को नहीं मिल पाता है।

 

नारद संवाद

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