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शाही स्नान : शाही अंदाज में निकली अखाडों की पेशवाई

मथुरा। बसंत पंचमी से चल रही हरिद्वार कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक का पहला शाही स्नान माघ पूर्णमासी को हुआ। बांकेबिहारी की नगरी में धूमधाम से शाही पेशवाई निकली। लोगों ने पुष्प वर्षा कर जगह जगह स्वाग किया। कुंभ मेले में साधु-संतों और श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।

संतों की शाही पेशवाई में सबसे आगे ध्वज पताका पर विराजमान हनुमान जी ने नेतृत्व किया। हनुमान जी के निशान की अगुवाई में शाही जुलूस सवारी के साथ चले। इसमें बैंडबाजे के साथ ऊंट-घोड़ा और घोड़ा-बग्गी पर सवार होकर साधु-संत निकले। शाही पेशवाई कुंभ क्षेत्र से शुरु होकर चुंगी चैराहा, अनाजमंडी, पुराना बजाजा, किशोरपुरा, विद्यापीठ चैराहा, बाँकेबिहारी मंदिरबाजार, अठखम्बा, वनखण्डी, लोई बाजार, प्रताप बाजार होते हुए पुनरू कुंभ मेला क्षेत्र पहुंची।

इस बीच जगह-जगह पेशवाई का इंतजार कर रहे भक्तों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
प्रातः श्रीपंच निर्मोही अनी के श्रीमहंत धर्मदास महाराज, श्रीपंच दिगम्बर अनी के श्रीमहंत किशन दास महाराज एवं श्रीपंच निर्मोही अनी के श्रीमहंत राजेन्द्र दास महाराज एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत धर्मदास महाराज सहित अनी के 18 अखाड़ोें के अलावा कुंभ क्षेत्र में लगे खालसाओं के महंतजन चांदी, सोने से जड़े छत्रों में रथों, बग्घियों में विराजित होकर पेशवाई में चल रहे थे। वहीं सजे-धजे घोड़ों और ऊंटों पर भी संत सवार होकर चल रहे थे। खिलाड़ी संत बनैटी, तलवार, लाठियां और अन्य शस्त्रों से करतब दिखा रहे थे। जिनके करतबोे को देख हर कोई चकित हो रहा था।

भक्तजन भी भक्ति संगीत की धुनों पर भाव नृत्य करे हुए चल रहे थे। शाही पेशवाई में हजारों वैष्णवजन भी शामिल थे। जो कि इस कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक के साक्षी बन रहे थे। वहीं शाही पेशवाई मे लंबे समय से के बाद एक साथ चल रहे श्रीमहंत एवं सतों के दर्शनों के लिए जगह-जगह भक्तों का जमावड़ा लगा।


 वहीं वैष्णवों ने श्रीमहंतों की आरती उतारी और पुष्प मालाओें से उनका स्वागत किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के ब्रज मंडल के अध्यक्ष हरिशंकर दास नागा ने बताया कि कुंभ महा पर्व हो या कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक इस शाही पेशवाई का इनमें विशेष महत्व है। शाही अंदाज में पेशवाई निकलने के बाद ही कुंभ क्षेत्र में पहुंचने पर निशान स्नान उसके बाद तीनों अनी और उनके अखाड़ों, सम्प्रदायों के श्रीमहंत एवं संत जन शाही स्नान करेंगे। यह धर्म परंपरा अनादिकाल से चल रही है। वही परंपराओं को वैष्णव संत महंत एवं भक्तों द्वारा निर्वाह किया जा रहा है। यही भारतीय सनातन धर्म का मूल दर्शन है।

पहली बार शामिल हुआ है किन्नर अखाडा


वृंदावन कुंभ में पहली बार किन्नर अखाडा शामिल हुआ है। किन्नर अखाडे की महंत हिमांगी सखी पूरे कुंभ में आस्था और आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। लोगों में किन्नर अखाडे की परंपराओं और रीति रिवाज को जानने की भी उत्सुकता देखने को मिल रही है।

यमुना तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब


मंत्रोच्चारों के मध्य अनी अखाड़ों के श्रीमहंतों ने अपने-अपने वीर ध्वज यानि निशानों को यमुना स्नान कराया और इसके बाद श्रीमहंतों एवं संतों ने शाही स्नान घाट पर पतितपावनी यमुना में स्नान किया। वहीं महंत, महामण्डलेश्वर एवं सतों के दर्शन करने के लिए पहुंचे हजारों भक्त भी इस शाही स्नान के साक्षी बने।

यह है वैष्णव बैठक की खासियत


वृंदावन में कुंभ की परंपरा भिन्न है। यहां केवल वैष्णव साधु ही सहभागिता करते हैं। हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज के कुंभ में वैष्णव, शैव समेत सभी संप्रदाय के संतों की मौजूदगी होती है। वृंदावन ही ऐसा कुंभ है, जहां शाही स्नान से पूर्व निकलने वाली पेशवाई में देवालयों को भी शामिल किया जाता है। देवालयों को पूरे सम्मान के साथ स्थान भी दिया जाता है। कुंभ के चार शाही स्नान की पेशवाई में संतों के साथ देवालयों के भी डोले निकलते हैं।

 

नारद संवाद

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