देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। ठंड अब शीत लहर में बदल चुकी है। रात ही नहीं दिन भी ठंडे हो गये हैं। सूरज बादलों की ओर में छुप जाये तो दिन में भी शरीर में कंपकंपी आ जाती है। कान्हा की नगरी में मठ मंदिरों में भगवान को सर्दी से बचाने के जतन पुरजोर किये जा रहे हैं।
शीत लहर से ठाकुरजी को बचाने के लिए उनके सेवायत अनेक उपाय कर रहे हैं। जब आराध्य दर्शन दे रहे हैं तो उन्हें गर्म पोशाक धारण करवाकर चांदी की अंगीठी में आग जलाई जा रही है। ताकि आराध्य पर शीत का प्रभाव न पड़ सके। इसके साथ ही आराध्य के भोग में भी ठंड का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सूखे मेवा, केसरयुक्त हलवा और गर्म दूध का भोग लगाया जा रहा है। ताकि गर्म भोग पाकर आराध्य को सर्द मौसम का प्रभाव न पड़े।
बदलते मौसम में ठा. बांकेबिहारी के भक्त हों अथवा दूसरे मंदिरों में आराध्य के सेवायत। मौसम के अनुसार ही उनकी सेवा पूजा करते हैं। मौसम बदलने के साथ आराध्य के पहनावे, खान-पान और दर्शन में बदलाव नजर आने लगता है। गर्मी के दिनों में जहां भोग में शीतल पेय का उपयोग अधिक मात्रा में होता है और फूलबंगला सजाकर उन्हें राहत देने के प्रयास होते हैं तो सर्दी में उन्हें गर्म तासीर वाले पदार्थों का भोग अर्पित कर सर्दी से बचने के हर उपाय उनके सेवायत करते हैं। मौसम में ठिठुरन बढ़ी तो ठाकुरजी को गर्म पोशाक धारण करवाने के साथ मंदिरों में आराध्य के आगे चांदी की अंगीठी में आग जलाकर उन्हें गर्माहट देने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। ठा. बांकेबिहारी सहित हर मंदिर में आराध्य को दिन में चार पहर भोग अर्पित होता है। श्रृंगार आरती के दौरान बालभोग, दोपहर को राजभोग, शाम को उत्थापन भोग और रात को शयनभोग आराध्य को अर्पित किया जाता है। मंदिर के पट बंद करने के दौरान आराध्य के लिए केसरयुक्त गर्म दूध व पान का बीड़ा परोसा जाता है। भोग में काजू, बादाम, चिलगोजा, पिस्ता समेत पंचमेवा परोसी जाती है तथा दूध, खीर और हलवा में केसर की मात्रा बढ़ा दी गई है।













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