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सर्वोदयी ब्राह्मण विकास संस्थान ने मनाई परशुराम जयंती

मथुरा। भगवान परशुराम जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार कहा जाता है.भगवान परशुराम की जयंती वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है.। इसेअक्षय तृतीया भी कहा जाता है।  इस दिन का विशेष महत्त्व होता है क्योकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन किये गए दान पुण्य का प्रभाव कभी खघ्त्म नहीं होता है।
भगवान परशुराम की माता का नाम रेणुका और पिता ऋषि जमदग्नि थे. वे उनकी चैथी संतान थे। परशुराम का तेज और शौर्य ही था कि उन्होंने कार्तवीर्य सहस्रार्जुन का वध करके अराजकता अन्याय, अत्याचार को समाप्त किया तथा नैतिकता और न्याय का साथ दिया. भगवान विष्णु के परशुराम के रूप में जन्म लेने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य धर्मं की स्थापना और अधर्म का विनाश करना था। अश्वत्थामा, राजाबलि, वेदव्यास, हनुमान जी और विभीषण व कृपाचार्य की तरह भगवान परशुराम को भी चिरंजीवी मानते हुए पद्मपुराण में लिखा है अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः।।
ये सातों अवतारआज भी चिरंजीवी मानेजाते हैं। परशुराम पृथ्वी के पाप बोझ को नष्ट करने और सभी प्रकार की बुराई को दूर करने के लिए धरती पर आए थे। इस दिन उपवास रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है ऐसा माना जाता है. इस दिन से हिंदू संस्कृति के स्वर्ण युग की शुरुआत हुई है और इसे पूरे भारत में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. परशुराम जयंती पर दान और ब्राह्मण को भोजन भी कराया जाता है।घ् जामदग्नाय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामःप्रचोदयात् ।। यह भगवान श्री परशुराम जी का सिद्ध मंत्र है इसके जाप करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है। जय श्री परशुराम।।

 

नारद संवाद

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