देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। संस्कृतभारती व्रजप्रान्त की मथुरा महानगर इकाई के तत्वावधान में मधुर-मिलन समारोह का आयोजन महानगर अध्यक्ष मा. जी. एस. पाण्डेय जी की अध्यक्षता में स्थानीय दीनदयाल नगर सरस्वती शिशु मंदिर के विशाल कक्ष में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर महानगर की इकाई के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी आरम्भ हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रान्तअध्यक्ष मा. डॉ. नटवर नागर के अतिरिक्त अन्य विशिष्ट अतिथि प्रान्त मंत्री मा. डाॅ. धर्मेन्द्रकुमार अग्रवाल, संगठन मंत्री मा. श्रवणकुमार तथा न्यास अध्यक्ष मा. ओमप्रकाश बंसल की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम के आरम्भ में श्री टीकाराम ने संस्कृत गीत ष्मृदपि च चन्दनमस्मिन् देशे ग्रामोग्रामरू सिद्धिवनम्ष् सस्वर प्रस्तुत किया। प्रान्त संगठन मंत्री मा. श्रवणकुमार ने संस्कृतभारती के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान का विश्व में प्रसार करने के लिए भारतीयों को संस्कृत सीखना परम आवश्यक है। कार्यक्रम के अध्यक्ष मा. जी. डी. पाण्डेय जी ने संस्था का परिचय देते हुए कहा कि यह संस्था मथुरा में संस्कृत के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। न्यास अध्यक्ष मा. ओमप्रकाश बंसल ने कहा कि संस्कृत भारती व्रजप्रान्त विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों को संस्कृत सिखाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। प्रान्त अध्यक्ष मा. डॉ. नटवर नागर ने कहा कि संस्कृत भारती भारत के अतिरिक्त विश्व के नो देशों में संस्कृत के प्रचार-प्रसार में संलग्न है। आज विश्व ने संस्कृत के महत्व को स्वीकार किया है और उसके अध्ययन में रुचि दिखाई है।
इस आयोजन में प्रान्त अध्यक्ष डाॅ. नटवर नागर ने महानगर की पुरानी कार्यकारिणी को भंग कर नवीन कार्यकारिणी के लिए आचार्य श्री ब्रजेन्द्र नागर को महानगर अध्यक्ष, आचार्य श्री मुरलीधर चतुर्वेदी को महानगर मंत्री और श्री योगेश उपाध्याय आवा को कोश प्रमुख घोषित किया। इस घोषणा के पश्चात तीनों पदाधिकारियों का संस्कृतभारती व्रजप्रान्त के पटके पहना कर सम्मानित किया गया। महानगर की शेष कार्यकारिणी घोषणा नवीन अध्यक्ष और मंत्री विचार विमर्श करके करेंगे।
नवीन अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने आभार व्यक्त किया और कहा कि हमें जो दायित्व दिया गया है हम उसे लगन के साथ पूरा करने के लिए प्रयत्नशील रहेंगे। नवीन महानगर मंत्री श्री मुरलीधर चतुर्वेदी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि घर के छोटे छोटे बच्चों को भी संस्कृत के संस्कार देने की आवश्यकता है। इस कार्यक्रम में सर्वश्री गंगाधर अरोड़ा, डाॅ. भगतसिंह, सनत्कुमार शर्मा अनुराग मिश्रा, श्रीमती कीर्ति शर्मा, हरस्वरूप यादव, हरिश्चन्द्र, संजय, टीकाराम पांडेय, पंकज धर द्विवेदी, उमेश जी आदि की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संचालन अनुराग मिश्रा ने किया। समारोह का समापन कल्याण मंत्र के साथ किया गया।












